नई शिक्षा नीति, नागपुर विश्वविद्यालय, स्नातक पाठ्यक्रम,(सोर्स: सोशल मीडिया)  
नागपुर

नागपुर यूनिवर्सिटी में बदलेगा पढ़ाई का पैटर्न, 1 साल पर सर्टिफिकेट, 2 साल पर डिप्लोमा…लागू होगी नई शिक्षा नीति

Nagpur University: नागपुर विश्वविद्यालय से जुड़े कॉलेजों में इस सत्र से नई शिक्षा नीति लागू होगी। अब प्रथम वर्ष के बाद सर्टिफिकेट, दूसरे वर्ष पर डिप्लोमा और तीसरे वर्ष पर डिग्री मिलेगी।

अंकिता पटेल

Nagpur University NEP Implementation: नागपुर राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय से संलग्नित महाविद्यालयों में इस सत्र से प्रथम वर्ष स्नातक में नई शिक्षा नीति लागू की जा रही है। इससे पढ़ाई का पैटर्न ही बदल जाएगा। प्रथम वर्ष यानी 2 सेमेस्टर उत्तीर्ण करने वाले को सर्टिफिकेट, द्वितीय वर्ष वाले को डिप्लोमा और तृतीय वर्ष करने वाले ही डिग्री मिलेगी। इतना ही नहीं, छात्र की मर्जी होगी कि वह कहां तक पड़ सकता है। नई शिक्षा नीति से छात्रों के सामने अनेक विकल्प तो खुले हैं लेकिन कॉलेजों का क्लस्टर नहीं होने से अभी भी तकनीकी अड़चन कायम है।

नीति का उद्देश्य छात्रों का सर्वांगीण विकास और रुचिकर विषयों की पढ़ाई करना है, जबकि मौजूदा व्यवस्था कुछ अलग ही है। इस सत्र से प्रथम वर्ष में 3 मेजर सबजेक्ट का चयन करना होगा। इसके अलावा एक विषय अदर इलेक्टिव (आई) या जनेटिक इलेक्टिव (जेई) लेना होगा। इसमें छात्र किसी भी संकाय के विषय का चयन कर सकता है। एक प्रैक्टिकल बेस्ड विषय होगा। इंडियन नॉलेज सिस्टम (आईकएस), भाषा के तहत अंग्रेजी विषय अनिवार्य होगा। साथ ही वैल्यू एजुकेशन कोर्स (वीएसी) होगा।

चौथे वर्ष मिलेगा 'ऑनर्स'

पहले वर्ष यानी 2 सेमेस्टर में छात्र को 44 क्रेडिट हासिल करना अनिवार्य होगा। इसके बाद उसे सर्टिफिकेट मिलेगा। यदि कोई छात्र केवल सर्टिफिकेट ही करना चाहता है तो उसे एक्जिट कोर्स करना होगा, उसके बाद वह पढ़ाई छोड़ सकता है। द्वितीय वर्ष में 88 क्रेडिट अनिवार्य होंगे। द्वितीय वर्ष में डिप्लोमा मिलेगा।

वहीं तृतीय वर्ष में 132 क्रेडिट आवश्यक होंगे। तृतीय वर्ष करने के बाद छात्र को डिग्री मिलेगी। 7वें और 8वें सेमेस्टर के लिए चौथा वर्ष होगा। इसमें एक मेजर सबजेक्ट होगा जिसके 5 पेपर लिये जाएंगे। चौथे वर्ष मेजर सबजेक्ट या रिसर्च करने का अवसर मिलेगा। इसके बाद छात्रों को ऑनर्स की डिग्री मिलेगी।

क्रेडिट बैंक में जमा होंगे प्वाइंट्स

क्रेडिट सिस्टम होने से छात्रों का क्रेडिट बैंक बनेगा। इसमें क्रेडिट जमा होंगे जो छात्र समय-समय पर देख भी सकेंगे। यह क्रेडिट विषयों को परीक्षा के साथ ही उपस्थिति, प्रोजेक्ट, फिल्ड वर्क आदि पर आधारित होगा। इससे छात्रों को प्रैक्टिकली होने का मौका मिलेगा, पहले की तरह केवल परीक्षा के ही अंक नहीं बल्कि अन्य एक्टिविटी के भी क्रेडिट मिलेंगे।

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