नागपुर में उद्धव ठाकरे (सोर्स: एआई फोटो)
शिवसेना यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने नागपुर के राम नगर स्थित ऐतिहासिक राम मंदिर पहुंचकर अपने राज्यव्यापी राम रक्षा आंदोलन की शुरुआत की। इस दौरान उनके साथ आदित्य ठाकरे और संजय राउत भी उपस्थित थे।उद्धव ठाकरे ने राम मंदिर में भगवान राम की प्रतिमा के दर्शन किए और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। उन्होंने मंदिर में सामूहिक रूप से राम रक्षा स्तोत्र का पाठ कर आशीर्वाद लिया।आंदोलन के तहत मंदिर परिसर में एक विशाल महाआरती का आयोजन किया गया। इस धार्मिक अनुष्ठान के जरिए अयोध्या राम मंदिर के दान में हुई कथित अनियमितताओं के खिलाफ विरोध जताया गया।नागपुर की सड़कों पर उद्धव ठाकरे के समर्थन में शिवसैनिकों और रामभक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। कार्यकर्ताओं ने हाथों में भगवा झंडे लेकर भाजपा सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और एकजुटता दिखाई।भाजपा द्वारा सभा के लिए निर्धारित मैदान पर मंडप डाल देने के कारण उद्धव ठाकरे को सड़क पर ही जनसभा संबोधित करनी पड़ी। उन्होंने इसे विरोधियों की कुरघोडी करार देते हुए अपना भाषण जारी रखा।उद्धव ठाकरे ने गरजते हुए कहा कि राम मंदिर किसी के बाप की जागीर नहीं है। उन्होंने भाजपा पर राम के नाम पर वोट लेकर मंदिर को 'लूटने' का गंभीर आरोप लगाया।आरएसएस के गढ़ में खड़े होकर उद्धव ने मोहन भागवत से पूछा कि क्या यह वही हिंदू राष्ट्र है जिसकी उन्होंने कल्पना की थी, जहां मंदिरों की तिजोरियां फोड़ी जा रही हैं। उन्होंने रामराज्य और शिवशाही लाने का संकल्प दोहराया।नागपुर में आयोजित इस आंदोलन का आगाज़ अत्यंत जोरदार और भक्तिमय रहा। उद्धव ठाकरे शुरुआत में प्रभु श्री राम की भक्ति में लीन और शांत नज़र आए, जहां उन्होंने मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना और महाआरती की। हालांकि, बाद में जनसभा को संबोधित करते हुए वे सत्ता पक्ष पर जबरदस्त आक्रामक हो गए और भाजपा व उसके नेताओं पर तीखे राजनीतिक प्रहार किए।