Sanjay Raut On Delimitation Bill: संसद के मानसून सत्र से पहले परिसीमन बिल को लेकर सियासी गलियारों में बहस तेज हो गई है। हाल ही में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की नेता और सांसद सुप्रिया सुले द्वारा परिसीमन बिल को लेकर दिए गए एक बयान के बाद महाराष्ट्र में विपक्षी गठबंधन महाविकास आघाडी और 'INDIA' गठबंधन में फूट पड़ती नजर आ रही है।
सुप्रिया सुले के बयान के पर शिवसेना (यूबीटी) के नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। नागपुर में मीडिया से बात करते हुए संजय राउत ने स्पष्ट किया कि ऐसे बड़े और राष्ट्रीय स्तर के मुद्दों पर विपक्षी गठबंधन 'INDIA' की कोई भी एक पार्टी अकेले फैसला नहीं ले सकती।
दरअसल, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की कार्यकारी अध्यक्ष और सांसद सुप्रिया सुले ने लोकसभा सीटों के पुनर्गठन यानी परिसीमन के मुद्दे पर कहा था कि अगर परिसीमन के दौरान देश के सभी राज्यों में लोकसभा सीटों में समान रूप से 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी होती है, तो इस पर किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा बुधवार को ऐलान किया था कि अगर मोदी सरकार इस तरह का बिल लाती है तो उनकी पार्टी इसका समर्थन करेगी।
सुप्रिया सुले के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए संजय राउत ने नागपुर में प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि यदि सरकार लोकसभा सीटों में 50% की वृद्धि का कोई प्रस्ताव या संशोधन लाती है और इस पर सभी दलों से चर्चा करती है, तो निश्चित रूप से उस बात पर विचार-विमर्श किया जा सकता है।
साथ सुप्रिया सुले के समर्थन वाले बयान पर संजय राउत ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने गठबंधन के रुख को साफ करते हुए कहा कि इस बारे में आगे क्या कदम उठाना है, इसका निर्णय INDIA गठबंधन में शामिल कोई भी अकेली पार्टी नहीं करेगी। न तो शिवसेना (UBT), न NCP (SP), न कांग्रेस और न ही गठबंधन का कोई अन्य दल अकेले तौर पर यह तय कर सकता है।
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बता दें कि संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हो रहा है। इस सत्र में परिसीमन बिल के पेश किए जाने के पूरी संभावना है। पिछले सत्र में विपक्ष की एकता के कारण बिल गिर गया था। महाराष्ट्र से शरद पवार की पार्टी का समर्थन मिलने से बीजेपी की अगुवाई वाले एनडीए का संख्याबल बढ़ गया है। शरद पवार की अगुवाई वाली एनसीपी (एसपी) के पास 8 सांसद हैं। इतना ही नहीं शरद पवार खुद राज्यसभा सदस्य हैं। ऐसे में संविधान संशोधन बिल पर मोदी सरकार की राह आसान हो गई है, क्योंकि टीएमसी के 20 बागी सांसदों और उद्धव ठाकरे के 6 सांसदों पहले ही एनडीए के समर्थन को मजबूत कर चुके हैं।