संदीप जोशी व संजय राउत (सोर्स: सोशल मीडिया) 
नागपुर

जो रामभक्तों को कोसते थे, आज... संजय राउत के राम रक्षा न्योते पर भड़की BJP, फडणवीस के करीबी ने धो डाला

Sandeep Joshi On Sanjay Raut: देवेंद्र फडणवीस को संजय राउत द्वारा 'राम रक्षा पाठ' का निमंत्रण देने पर बीजेपी नेता संदीप जोशी ने करारा हमला बोला है। उन्होंने इसे राजनीतिक वजूद बचाने का स्टंट बताया।

आकाश मसने

Sandeep Joshi On Uddhav Thackeray Ram Raksha Andolan: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत द्वारा भेजे गए ‘राम रक्षा पाठ’ के निमंत्रण पर भाजपा के पूर्व विधायक संदीप जोशी ने पत्र के जरिये ही जमकर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि फडणवीस को हिंदुत्व का पाठ पढ़ाने का प्रयास केवल एक राजनीतिक हास्य और बेहद कमजोर राजनीतिक स्टंट है।

संदीप जोशी ने संजय राउत पर बोला हमला

संदीप जोशी ने संजय राउत पर तंज कसते हुए कहा कि जो लोग कभी राम भक्तों को ‘हरामखोर’ कहते थे, उन्हें अब ‘राम रक्षा’ की याद आ रही है। उन्होंने कहा कि हिंदुत्व पर उपदेश देने से पहले संजय राउत को यह आत्मचिंतन करना चाहिए कि सत्ता के लिए उनकी पार्टी ने कितनी बार अपनी विचारधारा बदली है।

बीजेपी नेता संदीप जोशी ने कहा कि भाजपा हिंदुत्व केवल चुनाव के समय जागृत नहीं होता और न ही परिस्थितियों के अनुसार अपना रंग बदलता है। भगवा हमारे लिए केवल एक झंडा नहीं बल्कि विचार, संस्कार और जीवनशैली का प्रतीक है। राम भक्तों के प्रति शिवसेना नेताओं द्वारा की गई कथित अपमानजनक टिप्पणियों का उल्लेख करते हुए जोशी ने सवाल उठाया कि जो लोग ‘जय श्रीराम’ कहने वालों के लिए आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करते थे, वे आज किस नैतिक अधिकार से ‘राम रक्षा पाठ’ का निमंत्रण दे रहे हैं।

राम रक्षा नहीं, राजनीतिक अस्तित्व की चिंता: संदीप जोशी

CM देवेंद्र फडणवीस के करीबी संदीप जोशी ने कहा कि आज राम की रक्षा से अधिक अपने दल के राजनीतिक अस्तित्व की रक्षा की चिंता दिखाई दे रही है, इसलिए यह आयोजन राम भक्ति से अधिक राजनीतिक पुनर्वास का प्रयास प्रतीत होता है। मुख्यमंत्री को राम रक्षा पाठ का निमंत्रण देने से पहले संजय राउत को यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि उनकी पार्टी का नेतृत्व स्वयं राम रक्षा स्तोत्र का सही ढंग से पाठ कर सकता है या नहीं।

संदीप जोशी ने कहा कि राजनीति अवश्य करें लेकिन भगवान श्रीराम के नाम का उपयोग अपने राजनीतिक अस्तित्व को बचाने के साधन के रूप में न करें। महाराष्ट्र की जनता अब दिखावटी हिंदुत्व और वास्तविक हिंदुत्व के बीच का अंतर अच्छी तरह समझ चुकी है।

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