मनोज जरांगे पाटिल और डॉ. बबनराव तायवाडे (फोटो क्रेडिट-X) 
नागपुर

जरांगे पाटिल के आंदोलन से पहले ओबीसी फेडरेशन की बड़ी चेतावनी; OBC आरक्षण पर आंच आई तो होगा उग्र प्रदर्शन

Manoj Jarange Patil OBC Federation Warning 2026: मनोज जरांगे पाटिल के आंदोलन से पहले ओबीसी फेडरेशन की सरकार को बड़ी चेतावनी, आरक्षण से छेड़छाड़ पर आंदोलन की धमकी।

अनिल सिंह

Manoj Jarange Patil OBC Federation Warning: महाराष्ट्र में मराठा और ओबीसी समुदायों के बीच आरक्षण की यह जंग एक बार फिर बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच चुकी है। एक तरफ जहां मनोज जरांगे पाटिल अपनी मांगों को मनवाने के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ ओबीसी नेताओं की लामबंदी ने सरकार के सामने एक बड़ा धर्मसंकट खड़ा कर दिया है। इसी पृष्ठभूमि में राष्ट्रीय ओबीसी फेडरेशन के अध्यक्ष डॉ. बबनराव तायवाडे ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की, जिसमें उन्होंने सरकार और आंदोलनकारियों दोनों को कड़ा संदेश दिया।

डॉ. तायवाडे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि मनोज जरांगे पाटिल कल से जो विरोध प्रदर्शन शुरू कर रहे हैं, उसकी मांगें पूरी तरह पुरानी हैं। लोकतांत्रिक तरीके से किसी को भी आंदोलन करने का अधिकार है और ओबीसी समुदाय को उनके इस कदम से कोई व्यक्तिगत आपत्ति नहीं है। हालांकि, उन्होंने दृढ़ता के साथ यह शर्त रखी कि मराठा समुदाय की मांगों को पूरा करते समय मूल ओबीसी आरक्षण के कोटे और उसके अधिकारों पर किसी भी तरह का कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ना चाहिए।

'वेट एंड वॉच' की नीति पर कायम, लेकिन अधिकारों पर नहीं होगा कोई समझौता

ओबीसी फेडरेशन के अध्यक्ष ने संगठन की आगामी रणनीति को स्पष्ट करते हुए कहा कि उनका समुदाय फिलहाल 'प्रतीक्षा करो और देखो' (Wait and Watch) की भूमिका में है। इसका मतलब यह कतई नहीं है कि ओबीसी समाज अपने अधिकारों के प्रति सजग नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने किसी भी राजनीतिक दबाव या आंदोलन के डर से ओबीसी आरक्षण में कोई कमी या बदलाव करने का प्रयास किया, तो संगठन चुप नहीं बैठेगा।

'सगे सोयरे' अध्यादेश पर बबनराव तायवाडे का सबसे बड़ा कानूनी दावा

मनोज जरांगे पाटिल द्वारा बार-बार उठाई जा रही 'सगे सोयरे' कानून की मांग पर तायवाडे ने एक बड़ा बयान देकर सबको चौंका दिया। उन्होंने दावा किया कि जिस अध्यादेश को लागू करने की मांग मराठा प्रदर्शनकारियों द्वारा की जा रही है, वह वास्तव में पहले से ही कानूनी रूप से अस्तित्व में है। ऐसी स्थिति में, इस मुद्दे की आड़ लेकर ओबीसी के वैधानिक अधिकारों को कमजोर करने का कोई भी प्रयास किया गया, तो उसके बेहद गंभीर और दूरगामी परिणाम भुगतने पड़ेंगे।

दबाव में आई सरकार, सड़कों पर उतरने को तैयार हुआ ओबीसी समुदाय

इस सामाजिक खींचतान के बीच पूरा महाराष्ट्र अब इस बात पर ध्यान केंद्रित कर रहा है कि कल से शुरू होने वाले इस आंदोलन का ऊंट किस करवट बैठता है। तायवाडे ने अंतिम चेतावनी के रूप में कहा कि अगर सरकार ने घुटने टेके और ओबीसी आरक्षण में कोई कटौती की, तो राष्ट्रीय ओबीसी फेडरेशन के नेतृत्व में राज्य भर के करोड़ों ओबीसी नागरिक अपने अधिकारों की रक्षा के लिए सड़कों पर उतरेंगे और एक ऐसा उग्र आंदोलन शुरू होगा जिसे संभालना प्रशासन के लिए नामुमकिन हो जाएगा।

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