नागपुर रजिस्ट्री, ऑटो ट्रिगर सिस्टम, (सोर्सः AI डिजाइन फोटो) 
नागपुर

साठगांठ या ढिलाई? अधिकारियों की लापरवाही से लटका ऑटो ट्रिगर सिस्टम, नागपुर में रजिस्ट्री का काम ठप!

Auto Trigger System: महाराष्ट्र सरकार की नई ऑटो ट्रिगर प्रणाली लागू होने के बाद नागपुर में करीब 5,000 संपत्ति रजिस्ट्रियां अटक गई हैं। सिस्टम लिंक न होने से खरीदार और बिल्डर दोनों परेशान हैं।

अंकिता पटेल

Maharashtra Property Registration: नागपुर महाराष्ट्र सरकार ने संपत्ति की रजिस्ट्री (बिक्री-खरीद) होते ही नए मालिक का नाम स्वतः आखीव पत्रिका और भूमि अभिलेख रिकॉर्ड में दर्ज करने के लिए 'ऑटो ट्रिगर' प्रणाली को लागू करने का निर्णय लिया है। निर्णय निश्चित रूप से अच्छा है लेकिन सिस्टम अपग्रेड किए बिना नियम लागू कर देने से शहर में रजिस्ट्रियां रुक गई हैं।

लगभग 5,000 रजिस्ट्री रुकी होने की जानकारी सामने आ रही है। इससे जहां एक ओर बिल्डर परेशान हैं तो दूसरी ओर ग्राहक भी अपने घर से वंचित रह जा रहे हैं। सिटी सर्वे और रजिस्ट्री विभाग के सिस्टम को अब तक लिंक नहीं किया जा सका है।

जब तक दोनों विभागों के सिस्टम अपग्रेड और लिंक नहीं हो जाते तब तक लोगों को इसी प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। जानकारों ने बताया कि सरकार जो चाह रही है, वह काफी अच्छा कदम है।

इससे बोगस रजिस्ट्री रुक जाएगी। सबसे बड़ी बात यह कि लोगों की भाग-दौड़ कम होगी और अधिकारियों और दलालों की साठगांठ खत्म हो जाएगी। यही कारण है कि अधिकारी इस सिस्टम को अपडेट नहीं होने दे रहे हैं और जानबूझकर विलंब कर रहे हैं।

बिना आवेदन प्रक्रिया

अब घर या प्लॉट की रजिस्ट्री होने के बाद अलग से फेरफार के लिए सिटी सर्वे या भूमि अभिलेख कार्यालय में आवेदन करने की जरूरत नहीं होगी। इस डिजिटल व्यवस्था के तहत रजिस्ट्री पूरा होने के निर्धारित दिनों (जैसे लगभग 25 दिनों के भीतर नए मालिक का नाम स्वतः आखीव पत्रिका पर चढ़ जाएगा।

प्रक्रिया के ऑनलाइन और स्वतः जुड़ जाने से नागरिकों को चक्कर काटने और अनावश्यक शुल्कों या दलालों से मुक्ति मिलती है। यही सब दलालों और अधिकारियों के लिए जी का जंजाल बन गया है।

बोगस रजिस्ट्री वालों की हालत पतली

जानकारों की मानें तो 5,000 से अधिक रजिस्ट्रियां रुकी हुई है, तो बोगस रजिस्ट्री वाले लगभग 20,000 मामले अटके हुए हैं। ये इस चक्कर में हैं कि किसी भी तरह रजिस्ट्री हो जाए। ऑफलाइन में यह संभव है। यही कारण है कि राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले के प्रयासों को भी 'पलीता' लगाया जा रहा है।

डीओडी का फेरफार बन रहा दिक्कत

अब तक सैल डीड का म्यूटेशन होता था लेकिन नए आदेश में कहा गया है कि डीओडी का म्यूटेशन कराया जाए। इस प्रक्रिया के कारण ही विलंब होने लगा है। जानकारों का कहना है कि इस प्रक्रिया को जोड़ने के बाद दिक्कतें काफी बढ़ गई हैं।

रजिस्ट्री तब तक नहीं होती जब तक ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (ओसी) नहीं मिल जाता। डीओडी के वक्त ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट लेना सभी के लिए संभव नहीं है। इसलिए पूरी प्रक्रिया अटक रही है और लोग परेशान हो रहे है। प्लॉट को लिंक करने में परेशानी नहीं हो रही है। इसलिए रजिस्ट्री हो रही है। 7-12 में नाम चढ़ाना आसान है।

पहले सिस्टम फुलप्रूफ बने

निश्चित रूप से इस प्रकार की पहल से लोगों को काफी लाभ होगा। बीच के लोग गायब हो जाएंगे। ग्राहकों को भी लाभ मिलेगा लेकिन सरकार को चाहिए कि नियम लागू करने से पहले सिस्टम को अपठोड कर लें।

डीओडी का म्यूटेशन बिना ओसी के होना चाहिए, इससे ग्राहकों को होने वाली परेशानियों से बचाया जा सकेगा। सिस्टम को लिंक करने की प्रक्रिया जल्द से जल्द पूरी होनी चाहिए।

-क्रेडाई, पूर्व अध्यक्ष, गौरव अग्रवाला

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