नागपुर चुनाव (सौजन्य-सोशल मीडिया) 
नागपुर

पार्टी की इमेज के भरोसे उम्मीदवार, गली-गली चुनावी पोंगा! नागपुर में वोट मांगने भी नहीं पहुंचे प्रत्याशी

NMC Poll Campaign: नागपुर मनपा चुनाव में प्रचार के आखिरी 4 दिन, पर कई घर अब भी छूटे। क्या पार्टी की 'इमेज' दिलाएगी जीत? उम्मीदवारों के पम्पलेट और स्टिकर की गलियों में भरमार।

प्रिया जैस

Nagpur Door to Door Campaigning: महानगर पालिका चुनाव के लिए 15 जनवरी को वोटिंग होनी है। प्रचार के लिए मात्र 4 दिन ही शेष हैं और उम्मीदवार अब तक सभी मतदाताओं के घरों तक नहीं पहुंचे पाए हैं। किसी-किसी प्रभाग में तो केवल ऑटो व ई-रिक्शा में बंधा पोंगा ही शोर करता हुआ घूम रहा है। कहीं-कहीं उम्मीदवार ढोल-ताशे की आवाज के साथ गलियों में हाथ जोड़े फिर रहे हैं।

मतदाताओं को यह कमी खल रही है कि उनके घरों तक उम्मीदवार सीधे संवाद के लिए नहीं पहुंच रहे हैं। इस बार जो प्रचार की शैली चल रही है उससे तो लगता है कि मुख्य बड़े राजनीतिक दलों भाजपा और कांग्रेस के उम्मीदवार अपनी पार्टी की इमेज व चुनाव चिन्ह के भरोसे हैं।

गली से दिल्ली तक सत्ता में जो पार्टी बैठी है उसके उम्मीदवारों में जीत का अति आत्मविश्वास हुआ नजर आ रहा है तो कांग्रेस के उम्मीदवार शायद इसलिए अधिक मेहनत से बच रहे हैं कि उन्हें सुफल मिले या नहीं।

पम्पलेट व स्टीकर

उम्मीदवारों के पम्पलेट जरूर लोगों के घरों के दरवाजों में खोंसे हुए और आंगन में फेंके नजर आ रहे हैं। वहीं दरवाजों के बाहर दीवारों में स्टीकर भी चिपका नजर आ रहा है। उम्मीदवारों ने लगता है कार्यकर्ताओं को यह जिम्मेदारी दी है लेकिन वे नागरिकों से मिलकर उन्हें पम्पलेट देने की बजाय फेंक कर जा रहे हैं।

नगरसेवकों के चुनाव में प्रभाग या वार्ड के नागरिकों को यह अपेक्षा होती है कि उनका उम्मीदवार कम से कम एक बार तो उनसे प्रत्यक्ष मुलाकात कर वोट की अपील करे। यह मानसिकता चुनाव के समय तो और भी बलवती हो जाती है। जो उनसे मिलने आ गया उसे ही वे वोट करने की सोचते हैं लेकिन इस चुनाव में अधिकतर उम्मीदवार अब तक लोगों के घर-घर नहीं पहुंचे हैं।

एक गली पहुंचे, दूसरी छोड़ी

कुछ उम्मीदवार तो अपने समर्थकों के साथ संपर्क अभियान में जुटे हैं लेकिन उनका भी रवैया कुछ अजीब नजर आ रहा है। कुछ बस्तियों में वे एक गली में पहुंच रहे हैं तो दूसरी छोड़ रहे हैं। ऐसे में लोगों की नाराजगी उन्हें वोटिंग के दिन भुगतनी पड़ सकती है। वैसे भी सिटी में सभी सीटों पर भाजपा व कांग्रेस के बीच ही लड़ाई ही बताई जा रही है। इक्का-दुक्का सीटों पर बसपा, राकां अजीत पवार या फिर शिंदे सेना करिश्मा दिखा सकती हैं।

हालांकि अभी भी 4 दिन शेष हैं और हो सकता है कि उम्मीदवार प्रभाग में बचे हुए इलाकों को तेजी से कवर करते हुए मतदाताओं तक खुद पहुंचें। यह भी देखा जा रहा है कि कुछ उम्मीदवार घर-घर तक 2 बार पहुंच चुके हैं लेकिन अनेक का पहला ही राउंड पूरा नहीं हुआ है। इससे ऐसा लग रहा है कि वे अपनी पार्टी की इमेज के भरोसे चुनाव लड़ रहे हैं।

नेपाल में बाढ़ से हाहाकार, मदद के लिए सबसे पहले आगे आया भारत; 10 टन राहत सामग्री भेजी, देखें लिस्ट

चीन में अजित डोभाल का बड़ा दांव, भारत-चीन सीमा वार्ता में 8 मुद्दों पर बनी बात, LAC पर शांति के लिए बड़ा कदम

मणिपुर दहलाने की साजिश नाकाम, 13 उग्रवादी गिरफ्तार, रॉकेट-ग्रेनेड से लैंडमाइन तक बड़े हथियार बरामद

तिब्बत में बाढ़ से तबाही, सद्गुरु के कैलाश यात्रा ग्रुप के लोग फंसे; 77 इमिग्रेशन सेंटर पर, देखें VIDEO

Explainer: नेपाल में अचानक क्यों आई भारी तबाही, क्या है वो असली वजह; जिसने तबाह की सैकड़ों जिंदगियां