Nagpur Education Recruitment Dispute: नागपुर शहर में नगर युवक शिक्षण संस्था द्वारा 14 मार्च 2026 को जारी किए गाए 'एम्प्लायमेंट नोटिस' पर रोक लगाने की मांग करते हुए हाई कोर्ट में तीन अलग-अलग याचिकाएं दायर की गई। याचिका पर एक साथ सुनवाई के बाद न्यायाधीश अनिल किलोर और न्यायाधीश राज वाकोडे ने राज्य में विश्वविद्यालय और कॉलेज न्यायाधिकरणों के ठप पड़े कामकाज और राज्य सरकार के ढुलमुल रवैये पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की। न्यायालय ने इसे गंभीरता से लेते हुए राज्य के मुख्य सचिव को 28 अप्रैल, 2026 तक हलफनामा दायर कर इस लापरवाही का कारण स्पष्ट करने का सख्त निर्देश दिया।
किशोर श्रीधर हडके, पुरुषोत्तम डी. शोभने और राजेश के। नासरे द्वारा याचिकाएं दायर की गई। इन याचिकाओं में नगर युवक शिक्षण संस्था द्वारा 14 मार्च 2026 को जारी किए गए 'एम्प्लायमेंट नोटिस' पर रोक लगाने की मांग की गई। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि उनकी छंटनी के खिलाफ उनकी अपीलें नागपुर विश्वविद्यालय और कॉलेज न्यायाधिकरण में पहले से ही लंबित हैं। इसलिए नई भर्तियों पर रोक लगनी चाहिए।
सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि नागपुर न्यायाधिकरण के पूर्व पीठासीन अधिकारी का कार्यकाल काफी पहले समाप्त हो चुका है और अब तक किसी नए अधिकारी की नियुक्ति नहीं की गई है। इसके अलावा, अदालत को यह जानकर और भी आश्चर्य हुआ कि नागपुर न्यायाधिकरण का प्रभार महाराष्ट्र के किसी अन्य कार्यरत न्यायाधिकरण को भी नहीं सौंपा गया है।
सरकारी वकील ने भी अदालत में इस बात की पुष्टि की। यही चिंताजनक स्थिति अमरावती के विश्वविद्यालय और कॉलेज न्यायाधिकरण को भी है। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधि। आलोक डागा और राज्य सरकार की ओर से अधि। मारपकवार ने पैरवी की।
हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के इस कैजुअल अप्रोच पर सवाल उठाते हुए कहा कि न्यायाधिकरण निलंबन क्खस्तिगी, छटनी और सेवानिवृत्ति जैसे कर्मचारियों के महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई करता है।
ऐसे में सरकार का यह कतीय है कि न्यायाधिकरण हमेषा कार्यरत रहे।
अदालत ने स्पष्ट किया कि जब सरकार को पीठासीन अधिकारी के कार्यकाल की समाप्ति की तारीख पहले से पता होती है, तो पद खाली होने से काफी पहले ही नियुक्ति के लिए आवश्यक कदम क्यों नहीं उठाए जाते है।
मुख्य सचिव से जवाच मागने के साथ-साथ, हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट आदेश दिया कि 14 मार्च 2026 के रोजगार नोटिस के तहत यदि कोई भी नई नियुक्ति की जाती है। तो वह नागपुर न्यायाधिकरण में लंबित अपीलों के अंतिम फैसले के अधीन होगी।