हाई कोर्ट (फाइल फोटो) 
नागपुर

RTE बकाया फीस पर हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, 2019 से अटका था करोड़ों का फंड, 6 हफ्तों का दिया समय

RTE Fee Reimbursement: हाई कोर्ट का महाराष्ट्र सरकार को कड़ा आदेश। 6 सप्ताह में करें RTE की बकाया फीस का भुगतान। 2019 से अटके फंड को लेकर निजी स्कूलों को मिली बड़ी राहत।

प्रिया जैस

RTE Act 2009 High Court: शिक्षा के अधिकार (RTE) कानून के तहत निजी स्कूलों में 25% आरक्षित कोटे वाले छात्रों को मुफ्त शिक्षा देने के एवज में राज्य सरकार द्वारा दी जाने वाली फीस की प्रतिपूर्ति को लेकर हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने एक अहम आदेश जारी किया। न्यायाधीश अनिल किलोर और न्यायाधीश राज वाकोडे ने महाराष्ट्र सरकार को सख्त निर्देश दिया है कि वह याचिकाकर्ता स्कूलों के दावों की जांच कर कुल 6 सप्ताह के भीतर स्वीकार्य राशि का भुगतान करे।

याचिकाकर्ता के अनुसार सीतारामजी गनोरकर इंग्लिश स्कूल और अन्य स्कूलों द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने यह फैसला दिया। अदालत में याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता बी.जी. कुलकर्णी और राज्य सरकार की ओर से एजीपी पी.पी. पेंडके ने पैरवी की।

6 वर्षों से भुगतान नहीं

याचिकाकर्ता स्कूलों का कहना था कि वे अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 (RTE Act) की धारा 2(n) के दायरे में आते हैं। अधिनियम की धारा 12(2) के अनुसार, राज्य सरकार द्वारा प्रायोजित 25% कोटे के तहत बच्चों को मुफ्त शिक्षा प्रदान करने में जो भी खर्च आता है, उसकी प्रतिपूर्ति सरकार द्वारा की जानी चाहिए। स्कूलों की मुख्य शिकायत यह थी कि शैक्षणिक वर्ष 2019-2020 से उन्हें इस फीस का भुगतान नहीं किया गया है। इस दौरान अदालत के संज्ञान में यह भी लाया गया कि प्रिंसिपल सीट और औरंगाबाद बेंच द्वारा भी पहले इसी तरह के मामलों (जैसे विवेकानंद अकादमी और महाराष्ट्र बहुउद्देशीय सामाजिक संस्था के मामलों) में समान फैसले दिए जा चुके हैं।

निजी स्कूलों के लिए बड़ी राहत

सभी पक्षों को सुनने और पूर्व के आदेशों पर विचार करने के बाद हाई कोर्ट ने सरकार को प्रत्येक याचिकाकर्ता स्कूल के मामले में उनकी पात्रता और देय राशि की जांच करने के लिए 4 सप्ताह का समय दिया है। साथ ही अदालत ने आदेश में स्पष्ट किया कि जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद, जो भी राशि स्वीकार्य होगी, उसे अगले 2 सप्ताह के भीतर स्कूलों को जारी करना होगा।

यदि सरकार की जांच में कोई स्कूल इस भुगतान के लिए पात्र नहीं पाया जाता है, तो संबंधित विभाग को स्पष्ट रूप से उस आशय का एक आदेश पारित करना होगा। यदि कोई स्कूल सरकार द्वारा किए गए आंशिक भुगतान या दावे को पूरी तरह से खारिज किए जाने से असंतुष्ट होता है, तो वह कानून के तहत आगे की उचित कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होगा। हाई कोर्ट का यह फैसला उन कई निजी स्कूलों के लिए एक बड़ी राहत बनकर आया है, जो लंबे समय से आरटीई के तहत अपने बकाया फंड का इंतजार कर रहे थे।

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