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नागपुर के डोमणे ज्वेलर्स में 3 अक्टूबर को हुई डकैती का पुलिस ने खुलासा किया।
पुलिस के अनुसार, दुकान के काउंटर पर मिला फिंगरप्रिंट जांच में अहम सुराग बना।
400 से अधिक CCTV फुटेज खंगालने के बाद भी शुरुआत में ठोस जानकारी नहीं मिली।
नाफिस डेटाबेस में फिंगरप्रिंट का मिलान होने के बाद जांच उत्तर प्रदेश तक पहुंची।
Nagpur Crime Branch: पिछले कुछ वर्षों में चोर और लुटेरे इतने सतर्क हो गए हैं कि मौका ए वारदात पर उनके फिंगरप्रिंट मिलना मुश्किल काम था। यदि प्रिंट मिल भी जाए तो उसका मिलान नहीं हो पाता है लेकिन नेशनल ऑटोमेटेड फिंगरप्रिंट आईडेंटिफिकेशन सिस्टम नाफिस के जरिए पुलिस को आरोपी का सुराग मिला।
नाफिस में देशभर में अपराध करने वाले अपराधियों के फिंगरप्रिंट का डाटा जमा होता है। सीपी विश्वास नांगरे पाटिल ने बताया कि एमआईडीसी धानांतर्गत संगम रोड पर स्थित डोमणे ज्वेलर्स में विगत 3 अक्टूबर को हुई डकैती की वारदात में जहां पुलिस के पास आरोपियों का कोई सुराग नहीं था।
वहीं बस एक फिंगरप्रिंट से नागपुर क्राइम ब्रांच ने डकैती की गुत्थी सुलझा ली. डीसीपी दीपक अग्रवाल और एसीपी वैभव जाधव के मार्गदर्शन में पुलिस टीम ने एक सुराग के जरिए अपराधी का पीछा शुरू किया। उत्तर प्रदेश के बरेली में लगभग सप्ताह भर घात लगाए बैठी टीम ने आरोपी को दबोचा।
उसकी निशानदेही पर पुलिस ने अन्य 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया। पकड़े गए आरोपियों में अभिषेक सिंह ठाकुर, जयराम उर्फ जोगिंदर अशोक सिंह ठाकुर, शुभांकित नीलेश कुमार चतुर्वेदी और नागपुर निवासी राजन सामी शमां का समावेश है। पकड़ा गया आरोपी राजन शर्मा नागपुर का ही रहने वाला है।
उसे साइबर फ्रॉड के 2 मामलों में गिरफ्तार किया जा चुका है। शर्मा कुछ वर्ष पहले चेन्नई की एक जेल में बंद था। राजन जेल से जमानत पर रिहा हुआ और उसने अन्य आरोपियों को भी जेल से जमानत दिलाने में सहायता की। तब से उनकी दोस्ती गहरी हो गई थी।
पुलिस ने इस गैंग के मुखिया का नाम जारी नहीं किया है, बीते महीने इस गैंग ने नागपुर में सराफा व्यापारी के यहां डाका डालने का प्लान बनाया। अभिषेक, जोगिंदर, शुभांकित और अन्य आरोपी नागपुर आए। यहां राजन ने उनके होटल में रुकने का इंतजाम किया।
एक एसयूवी गाड़ी में आरोपियों ने शहर के अलग-अलग इलाकों में सराफा दुकानों की रेकी की। इस दौरान यह ध्यान रखा गया कि पुलिस को उनके कोई सुराग न मिलें। ढोमणे की दुकान पर लूट की योजना बनी।
राजन को मोटरसाइकिल खरीदने के लिए 70,000 रुपये दिए गए। एक ऑटो डीलर से राजन ने बाइक खरीदी। वारदात को अंजाम देने के बाद चारों आरोपी बाइक से आउटर रिंग रोड की ओर गए। बाइक को वापस एसयूवी गाड़ी में डाला गया और एक नाले में फेंका गया।
एमआईडीसी पुलिस के साथ क्राइम ब्रांच ने भी प्रकरण की जांच आरंभ की। पुलिस ने 400 से अधिक सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण किया, लेकिन कुछ खास मदद नहीं मिली। ढोमणे की दुकान के काउंटर पर पुलिस को एक फिंगरप्रिंट मिला। '
नाफिस का डाटाबेस खंगालने पर अभिषेक से मैच हुआ क्योंकि वह पहले भी वारदातों को अंजाम दे चुका था लेकिन उसे पहचानने वाला कोई नहीं था। एआई के जरिए पुलिस ने एक इमेज तैयार की। पुलिस उसके पीछे गाजियाबाद पहुंची।
आस-पास के लोगों से पूछताछ की गई। उत्तर प्रदेश के बरेली में उसे जाल बिछाकर पकड़ा गया। उसकी निशानदेही पर जयराम और शुभांकित को नोएडा से पकड़ा गया जबकि राजन मेरठ में पुलिस के हाथ लगा।
सीपी विश्वास नांगरे पाटिल ने कहा कि गैंग का मुखिया बहुत शातिर अपराधी है। क्राइम ब्रांच की इंस्पेक्टर शुभांगी देशमुख, एपीआई चेतन बोरखेड़े, नितिन चुलपार, राजाराम जाधव, पीएसआई विवेक झिंगरे और उनकी टीम ने बहुत पेशेवर तरीके से तकनीक का उपयोग कर इस कार्रवाई को अंजाम दिया।
इसीलिए टीम को 25,000 रुपये का रिवार्ड भी जारी किया जा रहा है। आरोपियों को पकड़ने में हेड कांस्टेबल अर्जुन यादव, कमलेश गणेर, मनोज टेकाम, प्रितम यादव, रितेश तुमडाम, योगेश वासनिक, महेंद्र सड़माके, नितिन वासनिक, चंद्रशेखर राघोर्ते, अनंता क्षिरसागर, पराग ढोक, रोशन तिवारी, नितिन वर्मा, कमलेश गहलोद, संदीप पांडे, सुधीर पवार, कुणाल गेडाम, धीरज पंचभावे, मिथुन नाइक, चैतन्य, परमेश्वर, आशीष धंदरे और अजमत शेख ने अहम भूमिका निभाई।