महाराष्ट्र बाघ मौत (सोर्स: गुगल जेमिनी)
नागपुर

नागपुर: 16 बाघों का हिसाब लापता! हाई कोर्ट ने NTCA से मांगा जवाब, आंकड़ों में हेरफेर पर उठे गंभीर सवाल

Maharashtra Tiger Deaths: महाराष्ट्र में बाघों की मौत के आंकड़ों को लेकर बड़ा अंतर सामने आया है। वन विभाग ने 180 जबकि NTCA ने 164 मृत बाघ बताए। बॉम्बे हाई कोर्ट ने NTCA से लिखित जवाब मांगा है।

वेदांत जोशी

Nagpur Tiger News: देश में बाघों के संरक्षण और सुरक्षा के दावों की हवा निकलती नजर आ रही है। जनवरी के शुरुआती दिनों में ही 4 बाघों की संदिग्ध मौतों के बाद बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने इस मामले का स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लिया है। हालांकि, अदालत में प्रस्तुत राज्य वन विभाग और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) की रिपोर्ट ने वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था पर ही प्रश्नचिह्न लगा दिया है। दोनों विभागों द्वारा पेश आंकड़ों में 16 मृत बाघों का कोई हिसाब ही नहीं मिल रहा है।

180 बाघ बनाम 164 बाघ, आंकड़ों में अंतर क्यों?

सुनवाई के दौरान अदालत मित्र (Amicus Curiae) चैतन्य ध्रुव ने अदालत के सामने राज्य वन विभाग और NTCA के आंकड़ों में अंतर का मुद्दा उठाया। राज्य वन विभाग के रिकॉर्ड में 180 बाघों की मौत दर्ज बताई गई, जबकि NTCA के आंकड़ों में मृत बाघों की संख्या 164 बताई गई। यानी दोनों आंकड़ों में 16 बाघों का अंतर है।

यह अंतर सामने आने के बाद NTCA की ओर से मौखिक तौर पर बताया गया कि उसकी वेबसाइट समय पर अपडेट नहीं होने के कारण आंकड़ों में यह अंतर आया। अदालत ने इस स्पष्टीकरण पर असंतोष जताते हुए NTCA को अगली सुनवाई से पहले लिखित हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।

अब अदालत के सामने यह स्पष्ट करना होगा कि दोनों संस्थाओं के आंकड़ों में अंतर क्यों है और रिकॉर्ड में दर्ज मौतों की वास्तविक संख्या क्या है।

महाराष्ट्र में बाघों की मौत पर बढ़ी चिंता

बाघों की मौत के मामलों को लेकर महाराष्ट्र पहले से ही चिंता के घेरे में है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में शुरुआती 22 दिनों के भीतर 19 बाघों की मौत दर्ज की गई थी। इसके चलते बाघों की मौत के मामले में महाराष्ट्र देश में दूसरे स्थान पर रहा था।

हाल के मामलों ने भी वन्यजीव सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।

  • 31 दिसंबर 2025 को वर्धा के सेलू-मुरपाड क्षेत्र: एक बाघिन की मौत अवैध बिजली की बाड़ के संपर्क में आने से होने की जानकारी सामने आई थी। आरोप है कि सबूत मिटाने के लिए शव को पानी में फेंक दिया गया।

  • 7 जनवरी को पेंच टाइगर रिजर्व के देवलापार क्षेत्र: 8-9 महीने के दो शावक मृत मिले। आधिकारिक तौर पर उनकी मौत आपसी संघर्ष से बताई गई, जबकि अज्ञात वाहन की टक्कर की आशंका भी जताई गई।

  • 19 जनवरी चंद्रपुर: ताडोबा से सटे इरई नदी के पात्र में करीब दो वर्ष की बाघिन का शव मिला। जांच में बिजली के करंट से मौत के बाद शव नदी में फेंके जाने की बात सामने आई।

अब NTCA के जवाब पर नजर

लगातार सामने आ रही बाघों की मौत और सरकारी रिकॉर्ड में आंकड़ों के अंतर ने संरक्षण व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हाई कोर्ट के निर्देश के बाद अब NTCA को अपने आंकड़ों में अंतर की स्पष्ट वजह बतानी होगी।

अदालत में दाखिल होने वाला हलफनामा यह साफ कर सकता है कि 16 बाघों के आंकड़ों में अंतर आखिर क्यों आया और दोनों रिकॉर्ड में कौन-सा आंकड़ा सही है।

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