Nagpur High Court Bail Rape Allegation: नागपुर हाई कोर्ट ने एक सनसनीखेज दुष्कर्म और पोक्सो मामले में आरोपी को जमानत दे दी। इस मामले में अहम मोड़ तब आया जब पीड़िता जो अब आलिग हो चुकी है, ने खुद आरोपी की जमानत पर कोई आपत्ति नहीं जताई और इस संबंध में अदालत में एक हलफनामा दायर किया। इसके बाद पीड़िता की रजामंदी को देखते हुए हाई कोर्ट ने आरोपी रिश्तेदार को जमानत प्रदान की। आरोपी की ओर से अधि। राजेन्द्र डागा ने पैरवी की।
एफआईआर के अनुसार 17 सितंबर 2025 को आरोपी अरविंद जाधव, जो रिश्ते में पीड़िता का चचेरा चाचा लगता है, दोपहर करीब 1 बजे पीड़िता के घर पहुंचा था। उस समय घर पर कोई नहीं था और पीड़िता की उम्र महज 17 साल 11 महीने थी। आरोप है कि उसने दरवाजा बंद कर नाबालिग के साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाए, जिसके परिणामस्वरूप पीड़िता गर्भवती हो गई। बाद में उसका गर्भपात करा दिया गया।
आरोपी 26 दिसंबर 2025 से ही जेल में बंद था। सुनवाई के दौरान आरोपी के वकील राजेन्द्र डागा ने अदालत को बताया कि पीड़िता अब बालिग हो चुकी है और दोनों पक्षों के बीच आपसी समझौता हो गया है। उन्होंने अदालत को जानकारी दी कि पीड़िता की शादी तय हो चुकी है जो अगले हफ्ते होने वाली है, इसलिए आरोपी को रिहा किया जाना चाहिए, पीड़िता की वकील भगत ने भी इस हलफनामे का समर्थन करते हुए कहा कि पीड़िता को जमानत से कोई आपत्ति नहीं है। वहीं राज्य सरकार की ओर से सरकारी वकील ठाकरे ने जमानत का कड़ा विरोध किया। उनका तर्क था कि पीड़िता द्वारा 'नो ऑब्जेक्शन' हलफनामा देना ही यह दर्शाता है कि उस पर रिश्तेदारों का भारी दबाव है। उन्होंने दलील दी कि आरोपी ने अपने पद और रिश्ते का दुरुपयोग करते हुए एक जघन्य अपराध किया है, इसलिए वह जमानत का हकदार नहीं है।
अदालत ने सभी पक्षों को सुनने के बाद कहा कि चूंकि पुलिस जाच पूरी हो चुकी है, चार्जशीट दायर की जा चुकी है और पीड़िता अब बालिग होकर अपनी सहमति दे चुकी है, इसलिए आरोपी को जमानत दी जा रही है। हालांकि कोर्ट ने 50,000 रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के 2 जमानतदारों की शर्त के साथ यह राहत दी है।
यह भी पढ़ें:-नागपुर से उठी आवाज, एयर इंडिया रखरखाव पर सवाल; विमान सुरक्षा मुद्दे पर AIESL कर्मचारियों का विरोध तेज
इसके साथ ही नागपुर हाई कोर्ट ने शतों में कहा कि आरोपी पीड़िता की शादी से पहले या उसके बाद किसी भी तरीके से उससे संपर्क नहीं करेगा, गवाहों को डराने-धमकाने या सबूतों के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ करने की सख्त मनाही है। आरोपी को ट्रायल की हर तारीख पर अदालत में पेश होना होगा, यदि वह लगातार 2 तारीखों पर अनुपस्थित रहता है तो राज्य सरकार उसकी जमानत रद्द करने की मांग कर सकती है।