Highlights
कारोबारियों पर अनावश्यक दबाव डालने के बजाय सहयोगी रुख अपनाने पर जोर।
जीएसटी से जुड़ी प्रक्रियाओं में सुधार के लिए कारोबारियों से सुझाव मांगे जा रहे हैं।
सुझावों के आधार पर तीन महीने में रिपोर्ट तैयार करने की बात कही गई।
रिफंड की समय-सीमा और कर अपराधों से जुड़े प्रावधानों में बदलाव का उल्लेख।
GST Nagpur Zone Meeting: GST लागू होने के 9 साल बाद सरकार का पूरा फोकस टैक्सपेयर्स का दायरा बढ़ाने और नकद यानी कैश टैक्स कलेक्शन में इजाफा करने पर है। केंद्र और राज्य के GST अधिकारियों को साफ निर्देश दिए गए हैं कि वे कर चोरी पकड़ने के लिए अब पुरानी सख्ती के बजाय आधुनिक डेटा एनालिसिस और खुफिया जानकारी का इस्तेमाल करें।
टैक्स कलेक्शन 14-15 फीसदी की वृद्धि के साथ स्टेबल हो चुका है, इसलिए करदाता बढ़ाकर ही इसमें इजाफा किया जा सकता है। व्यापार और उद्योग जगत की राय जानने के उद्देश्य से जीएसटी नागपुर जोन की ओर से 'फीडबैक' बैठक का आयोजन किया गया था।
जिसमें केंद्रीय अप्रत्यक्ष बोर्ड (CBIC) के चेयरमैन विवेक चतुर्वेदी और सदस्य संजय मंगल ने संवाद किया। शहर के प्रमुख उद्यमी, व्यापारी तथा संगठनों के प्रमुख इसमें शामिल थे। नागपुर जोन के मुख्य आयुक्त संदीप पुरी, अपर आयुक्त मुकुल पाटिल उपस्थित थे।
विवेक चतुर्वेदी ने कहा कि पिछले दिनों हुई GST काउंसिल की बैठक में कई बदलाव किए गए हैं जिसका सीधा तात्पर्य यह है कि अब ईज ऑफ डुइंग बिजनेस को आगे बढ़ाया जाए। लोगों को सरलतम कानून दिया जाए, ताकि नेट में अधिक से अधिक लोग आएं और राजस्व बढ़ सके।
संजय मंगल ने कहा कि जीएसटी विभाग अब इनकम टैक्स के 'प्यार से नियम मानने के लिए प्रेरित करना' अभियान की तर्ज पर काम करेगा। अधिकारियों से कहा गया है कि वे कारोबारियों के कामकाज में जरूरत से ज्यादा दखल न दे।
जीएसटी की दरे और प्रक्रियाएं अब काफी हद तक स्थिर हो चुकी है, इसलिए अधिकारियों का काम अब सिर्फ टैक्स वसूलना नहीं होगा बल्कि वे कारोबारियों के लिए 'मददगार' की भूमिका निभाएंगे। अधिकारी अब टैक्सपेयर्स पर बेवजह दबाव डालने के बजाय 'सहयोगी रुख' अपनाएंगे, ताकि उनके बीच भरोसा कायम किया जा सके।
इसके निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं। कार्यक्रम में प्रशांत मोहता, मालपानी निर्भय संचेती, अजय गुप्ता, दीपेन अग्रवाल, शशिकांत कोठारकर, किशोर मालवीय, जुल्फेश शाह, स्वप्निल अहिरकर, हेमंत सारडा उपस्थित थे।
वस्तु एवं सेवा कर (GST) के तहत गिरफ्तारी का प्रावधान समाप्त करने की सिफारिश की गई है। साथ ही केस चलाने की न्यूनतम सीमा 1 करोड़ से बढ़ाकर 5 करोड़ कर दी गई है।
न्यूनतम सजा की अनिवार्यता को खत्म कर दिया गया है। जिन मामलों में कोई विशिष्ट जुर्माना लागू नहीं होता वहां सामान्य जुर्माना 25,000 से घटाकर 10,000 कर दिया गया है।
केंद्रीय अप्रत्यक्ष बोर्ड (CBIC) के चेयरमैन विवेक चतुर्वेदी चतुर्वेदी ने कहा कि अब जीएसटी दर को लेकर कोई बात नहीं कर रहा है। लोगों को कानून सरल चाहिए। इसलिए लोग अब जीएसटी रजिस्ट्रेशन से लेकर रिफंड की प्रक्रियाओं पर बात करने लगे है।
काउंसिल ने भी इसे समझ लिया है और उसी के अनुरूप कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि देशभर के कारोबारियों से चर्चा की जा रही है और उनसे सुझाव मांगे जा रहे हैं। इन सुझावों पर 3 माह में रिपोर्ट बनाई जाएगी और फिर सुधार के और कदम उठाए जाएंगे।
रिफंड दावी की पावती मिलने की समय-सीमा 15 दिनों से घटाकर 10 दिन कर दी गई है।
जोखिम आधारित मूल्यांकन के तहत, पावती मिलने के 3 कार्य दिवसों के भीतर 90% पात्र रिफंड दावों को मंजूरी देकर रिफंड ऑर्डर जारी कर दिया जाएगा।