नागपुर ट्रैफिक जाम व सड़क पर गंदगी सोर्स: नवभारत फोटो
नागपुर

चौपाटी बन जाती है सड़क! नागपुर के VIP इलाके सिविल लाइंस का बुरा हाल; अतिक्रमण और गंदगी से बेहाल जनता

Civil Lines Encroachment: नागपुर की हिस्लॉप कॉलेज रोड पर शाम होते ही ठेलों और भीड़ से जाम लग जाता है। सुबह सड़क के किनारे कचरे और बेतरतीब खड़े वाहनों से प्रशासन पर सवाल उठ रहे हैं।

अंकिता पटेल

Hislop College Road Encroachment: नागपुर शहर के सबसे प्रमुख और वीआईपी क्षेत्रों में शामिल सिविल लाइंस का हिस्लॉप कालेज रोड हर शाम अतिक्रमण की भारी मार झेलता है। देर रात तक चलने वाले ठेले और इन पर लगने वाली भीड़ से पूरा रास्ता जाम हो जाता है और हर सुबह ही सड़क गंदगी से पटी नजर आती है।

अब यह रोड हर दिन स्थानीय प्रशासन की सफाई व्यवस्था और यातायात प्रबंधन के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। साफ नजर आता है कि किस तरह शाम ढलते ही यह पूरा मार्ग अव्यवस्था, गंदगी और बेतरतीब ट्रैफिक का शिकार हो जाता है। वहीं अगले दिन सड़क के दोनों ओर बिखरा कचरा और अव्यवस्थित ढंग से खड़े वाहन प्रशासन की घोर लापरवाही को उजागर करते हैं।

न कोई पार्किंग, न ही कोई ट्रैफिक सिस्टम हर शाम दुर्घटना का बड़ा खतरा

दूसरा चिंताजनक पहलू सड़क पर लगे वाहनों की लंबी कतार है। फूड ज्वाइंट पर आने वाले लोग अपने दोपहिया और चारपहिया वाहन सड़क पर ही बेतरतीब ढंग से खड़े कर देते हैं।

भीड़ के कारण हाल यहां तक भी बिगड़ जाते हैं कि फोरलेन सड़क बीच में से गली सरीखी रह जाती है। यह नजारा देखकर लगता है कि किसी भी दिन यहां कोई बड़ी अनहोनी या सड़क दुर्घटना हो सकती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कोई दुर्घटना होती है तो इसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी?

बैरिकेडिंग, स्थायी समाधान की सख्त आवश्यकता

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस अव्यवस्था को रोकने के लिए ठोस और कड़े कदम उठाने की जरूरत है। चाहे इसे अस्थायी रूप से रस्सी, पेंट या बैरिकेडिंग से अलग किया जाए, उद्देश्य ये ही होना चाहिए कि उस जगह पर गाड़ियां न आएं और न ही कोई अतिक्रमण हो।

यदि नगर निगम और यातायात पुलिस नो-पार्किंग और नो-हॉकर्स जोन को स्पष्ट रूप से बैरिकेडिंग या पेंट से चिन्हित कर दे तो सड़क को बेजा कब्जों और हादसों से बचाया जा सकता है।

नागपुर ट्रैफिक जाम व सड़क पर गंदगी,

फूड स्टॉलों के बाद सिर्फ गंदगी का अंबार

शाम होते ही इस सड़क पर बड़ी संख्या में फूड स्टॉल सक्रिय हो जाते हैं। भेलपुरी, चाट, चाइनीज, छोले-कुलचे से लेकर फास्ट फूड और अलग-अलग प्रकार के ड्रिक्स की फ्रेंचाइजी वाले भी यहां सड़क दुकानदारी करते नजर आते हैं।

खाने-पीने के शौकीनों की भारी भीड देर रात तक यहां उमड़ती है लेकिन इस चहल-पहल का अंत बेहद शर्मनाक स्थिति में होता है। स्टॉल संचालकों और ग्राहकों के जाने के बाद सड़क किनारे केवल डिस्पोजेबल प्लेटें, प्लास्टिक कचरा और सड़ता हुआ खाना ही बचा रह जाता है।

सफाई और स्वच्छता का कोई ध्यान न रखें जाने से सार्वजनिक स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है, फिर भी कोई जवाबदेही तय नहीं की जा रही।

निरीक्षण के नाम पर निभा रहे सिर्फ औपचारिकता

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि मनपा की टीम ने केवल एक-दो मौकों पर इलाके का दौरा किया लेकिन इसके बाद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।

कागजी कार्रवाई और निरीक्षण के अलावा धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। प्रशासन की इस उदासीनता से स्थानीय निवासियों और राहगीरों में गहरा आक्रोश पनप रहा है।

सभी का आरोप है कि अतिक्रमण उन्मूलन दस्ता दिन में गुजरता है और फूड स्टॉल वालों का अतिक्रमण शाम से रात तक पैर पसारे रहता है।

नागरिकों की मांग है कि मनपा और यातायात पुलिस इस रोड घर नियमित गश्त करे, कचरा फैलाने वाले फूड स्टॉल संचालकों पर भारी जुर्माना लगाया जाए।

वाहनों की बेतरतीब पार्किंग रोकने के लिए बैरिकेडिंग लगाकर सख्त अभियान चलाया जाए, यदि समय रहते कड़ी कार्रवाई नहीं हुई तो सार्वजनिक स्थलों का यह दुरुपयोग पूरे शहर के लिए मिसाल बन जाएगा।

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