Government Wheat Procurement: देश में खाद्यान्न की कीमतों में बढ़ोतरी ने विशेषकर आम शहरी नागरिकों की चिंता बढ़ा दी है। देश में गेहूं की कीमतों को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ गई है। सरकारी खरीद रिकॉर्ड तोड़ने और खुले बाजार में सप्लाई घटने से गेहूं के भाव 2950 से 2970 रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच गए हैं। इसका सीधा असर आम आदमी के आटे पर पड़ना तय माना जा रहा है।
कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के उदय सुरेशभाई ठक्कर ने कहा कि सरकार ने इस सीजन में लक्ष्य से ज्यादा 356-357 लाख मीट्रिक टन गेहूंव खरीद लिया है। किसानों का करीब 90% माल सरकारी गोदामों में जा चुका है।
इससे मंडियों में सप्लाई घटी है। मध्य प्रदेश, यूपी, हरियाणा, राजस्थान, पंजाब जैसे गेहूं उत्पादक राज्यों में खुले बाजार के लिए माल ही नहीं बचा है। इसके अलावा सरकार ने गेहूं का निर्यात खोल दिया है, लेकिन खुले बाजार में सरकारी बिक्री (OMSS) की अभी कोई खबर नहीं है। इससे नीचे के भाव और मजबूत हो गए हैं।
जब गेहूं 2950 रुपए पार करेगा तो मिलों को महंगा गेहूं मिलेगा। अभी ब्रांडेड आटा 40 से 45 रुपए किलो बिक रहा है। कारोबारियों का मानना है कि अगर यही रुख रहा तो अगले 15-20 दिनों में आटे में 2 से 4 रुपए प्रति किलो की बढ़ोतरी हो सकती है। यानी आम आदमी का आटा सच में और गीला होने वाला है।
वैसे सरकार के पास अभी भी बफर स्टॉक भरपूर है। पिछले साल भी जब भाव 2800 के पार गए थे, तो सरकार ने OMSS के तहत 2300 रुपए में गेहूं बेचकर बाजार को कंट्रोल किया था। इस बार भी बाजार को उम्मीद है कि सरकार जल्द ही OMSS शुरू करेगी। लेकिन जानकारों का कहना है कि जब तक OMSS नहीं आता, तब तक मंदी की कोई गुंजाइश नहीं है। ठक्कर ने भी व्यापारियों को सलाह दी है कि स्टॉक वाला माल बेचने में जल्दबाजी न करें।