पार्थ पवार व सुषमा अंधारे (सोर्स: सोशल मीडिया) 
मुंबई

पार्थ पवार को बचाने में जुटे राजस्व और पुलिस अधिकारी, सुषमा अंधारे ने लगाया बड़ा आरोप

Parth Pawar Land Scam: शिवसेना (यूबीटी) नेता सुषमा अंधारे ने आरोप लगाया कि पुणे भूमि घोटाले में पार्थ पवार को बचाने के लिए राजस्व और पुलिस विभाग दबाव में हैं।

आकाश मसने

Sushma Andhare On Parth Pawar Pune Land Scam: शिवसेना (यूबीटी) की नेता सुषमा अंधारे ने शुक्रवार को महाराष्ट्र के राजस्व और पुलिस विभागों पर उपमुख्यमंत्री अजित पवार के बेटे पार्थ पवार को विवादास्पद पुणे भूमि सौदा मामले में कार्रवाई से बचाने की कोशिश करने का आरोप लगाया है।

यह मामला पार्थ पवार से जुड़ी एक कंपनी से संबंधित 300 करोड़ रुपए के भूमि सौदे से जुड़ा है, जो अनियमितताओं के आरोपों के कारण एक बड़ा राजनीतिक विवाद बन गया है।

इस विवाद के चलते सरकार को एक उप-पंजीयक को निलंबित करने और उच्च स्तरीय जांच के आदेश देने पड़े हैं। इस लेनदेन के संबंध में तीन लोगों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) भी दर्ज की गई है।

अधिकारी पार्थ का नाम लेने से कर रहे परहेज

सुषमा अंधारे ने अधिकारियों की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि जब जांच रिपोर्ट में पार्थ पवार के हस्ताक्षर का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है, तब भी अधिकारियों ने उनका नाम लेने से क्यों परहेज किया है? ये हस्ताक्षर जिला उद्योग बोर्ड के स्टाम्प शुल्क में छूट देने के प्रस्ताव पर थे। शिवसेना (यूबीटी) नेता ने यह भी बताया कि पंजीकरण प्रक्रिया में दस्तावेज संख्या 9018/225 का उपयोग किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि राजस्व विभाग और पुलिस पार्थ पवार को कानूनी कार्रवाई से बचाने की कोशिश कर रहे हैं।

क्या है मामला?

यह जमीन पुणे के पॉश मुंधवा क्षेत्र में स्थित है। अधिकारी के अनुसार, यह जमीन 40 एकड़ की है, जिसे 'महार वतन' भूमि के रूप में दर्शाया गया है, जो कि महार (अनुसूचित जाति) समुदाय की वंशानुगत भूमि है। इस जमीन को ₹300 करोड़ में अमाडिया एंटरप्राइजेज एलएलपी को बेच दिया गया। पार्थ पवार भी इस कंपनी में साझेदार हैं।

यह कंपनी अपने साझेदार दिग्विजय अमरसिंह पाटिल द्वारा प्रतिनिधित्व की गई थी। इस सौदे पर स्टाम्प शुल्क माफ कर दिया गया था। एक अधिकारी ने बताया कि यह जमीन शीतल तेजवानी नामक व्यक्ति के माध्यम से बेची गई थी, जिसके पास इस संपत्ति की पावर ऑफ अटॉर्नी थी और संपत्ति पर कुल 272 नाम दर्ज थे। अधिकारी ने यह भी बताया कि सरकारी जमीन होने के कारण इस प्लॉट को किसी निजी कंपनी को बेचा नहीं जा सकता।

इस बीच, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने अलग आरोप लगाते हुए दावा किया कि पार्थ पवार एक देसी शराब बनाने वाली कंपनी के मालिक हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अजित पवार ने आबकारी विभाग अपने पास रखा है और अपने बेटे की कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए कई फैसले लिए हैं।

(एजेंसी इनपुट के साथ)

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