मुंबई में अवैध झोपड़ों पर नजर रखने के लिए एसआरए ने ‘नेत्रम’ तकनीक अपनाई।
2011 की सैटेलाइट तस्वीरों से नए अवैध निर्माणों की पहचान होगी।
बीएमसी, म्हाडा और रेलवे समेत जमीन मालिक एजेंसियों को तुरंत मिलेगी सूचना।
Mumbai Illegal Slum Encroachments: मुंबई में सरकारी जमीनों पर बढ़ते अवैध झोपड़ों और अतिक्रमण पर अंकुश लगाने के लिए झोपड़पट्टी पुनर्वसन प्राधिकरण (एसआरए) ने आधुनिक तकनीक का सहारा लिया है। प्राधिकरण ने ‘नेत्रम’ डिजिटल प्रणाली के जरिए सरकारी जमीनों पर होने वाले नए निर्माणों की निगरानी शुरू की है।
इस व्यवस्था में सैटेलाइट तस्वीरों की मदद से पुराने और मौजूदा निर्माणों की तुलना की जा रही है, ताकि नए अवैध ढांचों की पहचान कर संबंधित एजेंसियों को कार्रवाई के लिए सूचित किया जा सके।
एसआरए की इस प्रणाली में वर्ष 2011 की सैटेलाइट तस्वीरों की तुलना मौजूदा तस्वीरों और जमीनी स्थिति से की जाती है। महाराष्ट्र रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर से प्राप्त पुरानी तस्वीरों के आधार पर यह पता लगाने में मदद मिलती है कि संबंधित स्थान पर पहले से झोपड़ा मौजूद था या वहां बाद में निर्माण किया गया। इससे सरकारी जमीनों पर नए अतिक्रमण और पुराने ढांचों में हुए विस्तार की पहचान करना आसान हो सकता है।
एसआरए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. महेंद्र कल्याणकर की देखरेख में इस प्रणाली को विकसित किया गया है। इसके निर्माण में गुजरात स्थित भास्कराचार्य नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्पेस एप्लीकेशंस एंड जियो-इन्फॉर्मेटिक्स (बीआईएसएजी-एन) ने तकनीकी सहयोग दिया है। प्रणाली के संचालन और निगरानी के लिए एसआरए मुख्यालय में अलग से ‘नेत्रम’ कक्ष स्थापित किया गया है।
राज्य सरकार की नीति के अनुसार, निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करने वाले 2011 तक के झोपड़े पुनर्वास के पात्र हो सकते हैं। इसके बाद बने निर्माणों की पहचान और उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करना महत्वपूर्ण है। हालांकि, केवल निर्माण की तारीख के आधार पर पुनर्वास की पात्रता तय नहीं होती; अन्य निर्धारित शर्तों की जांच भी जरूरी है।
मुंबई शहर में राज्य सरकार, म्हाडा, बीएमसी, रेलवे और अन्य सरकारी एजेंसियों की जमीनों पर अतिक्रमण की शिकायतें सामने आती रही हैं। नेत्रम प्रणाली के जरिए संबंधित जमीन मालिक विभागों को संभावित अवैध निर्माणों की जानकारी साझा करने की व्यवस्था बनाई गई है, जिससे स्थल निरीक्षण और नियमानुसार कार्रवाई में तेजी आ सकती है।
एसआरए ने मुंबई बीएमसी, म्हाडा, अतिरिक्त जिलाधिकारी कार्यालय, एमएमआरडीए और एमएसआरडीसी सहित संबंधित विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों को इस प्रणाली के इस्तेमाल का प्रशिक्षण दिया है। इसका उद्देश्य अवैध निर्माणों की लोकेशन की पहचान, विभागों के बीच समन्वय और समय पर कार्रवाई को आसान बनाना है। प्राधिकरण को उम्मीद है कि तकनीक के इस्तेमाल से नए अतिक्रमण रोकने और झोपड़पट्टी पुनर्वास प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने में मदद मिलेगी।