संजय राऊत के अल्बानिया हिंसा संबंधी बयान से राजनीतिक विवाद।
सुप्रीम कोर्ट पर टिप्पणी को लेकर भाजपा और शिवसेना ने की आलोचना।
राऊत ने भारत को अल्बानिया की घटनाओं से सबक लेने की सलाह दी।
Maharashtra Politics Dispute: शिवसेना (उबाठा) के नेता संजय राऊत के अल्बानिया में प्रदर्शनकारियों द्वारा उच्चतम न्यायालय की इमारत में आग लगाए जाने से जुड़े बयान पर महाराष्ट्र की राजनीति में विवाद खड़ा हो गया है।
राऊत ने इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर साझा करते हुए भारत को भी इससे सबक लेने की सलाह दी। उनके बयान पर भाजपा और शिवसेना नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
संजय राऊत ने 'एक्स' पर पोस्ट में दावा किया कि अल्बानिया में लोग इसलिए नाराज थे, क्योंकि वहां का उच्चतम न्यायालय भ्रष्ट प्रधानमंत्री की मदद कर रहा था। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदर्शनकारियों ने संसद, सरकारी कार्यालयों और मंत्रियों के घरों को निशाना बनाया है। राऊत ने अपनी टिप्पणी में सभी देशों, खासकर भारत, को इन घटनाओं से सबक लेने की बात कही।
यूरोपीय देश अल्बानिया में प्रधानमंत्री एडी रामा के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन होने की जानकारी सामने आई है। इन प्रदर्शनों में छात्रों और अन्य प्रदर्शनकारियों के शामिल होने का भी उल्लेख किया गया है।
शिवसेना नेता संजय निरुपम ने संजय राऊत के बयान की आलोचना करते हुए उनके पुराने मामले का जिक्र किया। निरुपम ने कहा कि राऊत ने महज दो दिन पहले ही भारतीय सुप्रीम कोर्ट से माफी मांगी थी और अब उसी न्यायपालिका पर सवाल उठा रहे हैं।
निरुपम ने आरोप लगाया कि राऊत यूरोप में हुई हिंसा के दृश्य दिखाकर देश में गलत संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर राऊत को जेल में डाला गया, तो वह लोकतंत्र की दुहाई देने लगेंगे। हालांकि, यह निरुपम की राजनीतिक प्रतिक्रिया और आरोप हैं।
भाजपा प्रवक्ता सिद्धार्थ यादव ने भी राऊत के बयान पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि भारत में अराजकता का कोई मॉडल काम नहीं करेगा। उनके मुताबिक, भारत एक लोकतांत्रिक देश है और आगे भी मजबूत लोकतंत्र बना रहेगा।
यादव ने कहा कि देश की जनता विपक्षी नेताओं के बयानों पर नजर रख रही है। इस तरह अल्बानिया की घटना को लेकर शुरू हुआ विवाद अब महाराष्ट्र राज्य की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का मुद्दा बन गया है।