राज ठाकरे ने वायरल ऑडियो क्लिप को लेकर बीजेपी पर साधा कड़ा निशाना।
ऑडियो में पांच सौ करोड़ रुपये के लेन-देन और मीडिया पर दबाव की चर्चा है।
मुख्यमंत्री द्वारा फोरेंसिक जांच मांगे जाने पर राज ठाकरे ने उठाए गंभीर सवाल।
Raj Thackeray Viral Audio Clip Controversy: महाराष्ट्र की राजनीति में एक 29 मिनट की वायरल ऑडियो क्लिप, जिसे 'फ्रेंडशिप फाइल' कहा जा रहा है, को लेकर हड़कंप मच गया है। इस कथित वायरल ऑडियो क्लिप पर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे ने भारतीय जनता पार्टी और राज्य सरकार पर सीधा व तीखा हमला बोला है।
राज ठाकरे ने इस ऑडियो क्लिप को बेहद भयंकर करार दिया और कहा कि यह केवल 500 करोड़ रुपये का मुद्दा नहीं है, बल्कि सवाल यह है कि बीजेपी की आईटी सेल किस तरह की खतरनाक योजनाएं और प्लानिंग बनाती है।
राज ठाकरे के अनुसार, इस वायरल 'फ्रेंडशिप फाइल' ऑडियो क्लिप में बीजेपी के कुछ पदाधिकारी, पार्टी के सोशल मीडिया में अहम भूमिका निभाने वाले लोग, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक वरिष्ठ पदाधिकारी और खुद को निष्पक्ष राजनीतिक विश्लेषक बताने वाले कुछ यूट्यूब इन्फ्लुएंसर्स शामिल हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि खुद को निष्पक्ष बताने वाले ये यूट्यूबर्स दरअसल बीजेपी की 'कीचड़ उछालने वाली सेना' का कवच पहनकर घूम रहे हैं।
राज ठाकरे ने दावा किया कि इस 29 मिनट की बातचीत में कई गंभीर और चौंकाने वाले मुद्दों पर चर्चा सुनी जा सकती है। इसमें किसी द्वारा किसी को 500 करोड़ रुपये देने की बात से लेकर मीडिया पर सीधा दबाव बनाने और उन्हें डराने-धमकाने का जिक्र है। इतना ही नहीं, जब भी सरकार के खिलाफ कोई संवेदनशील या भावनात्मक मुद्दा उठने लगता है, तो लोगों का ध्यान भटकाने के लिए नया धार्मिक ध्रुवीकरण का मुद्दा कैसे आगे बढ़ाना चाहिए, इसकी भी विस्तृत योजना पर चर्चा होती सुनाई दे रही है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा इस ऑडियो क्लिप की सत्यता जांचने के लिए फोरेंसिक रिपोर्ट मांगे जाने पर राज ठाकरे ने निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री फोरेंसिक रिपोर्ट का हवाला देकर सिर्फ समय बिताने की कोशिश कर रहे हैं। राज ठाकरे ने कड़े शब्दों में कहा कि इस ऑडियो में जो बातें कही गई हैं, वे वास्तव में 'लोकतंत्र की हत्या और बलात्कार' हैं।
मुख्यमंत्री द्वारा क्लिप को दो साल पुराना बताए जाने और इसके जारी होने के समय पर सवाल उठाने पर राज ठाकरे ने कहा कि यह सरकार के भीतर चलने वाली शह-मात की राजनीति को दर्शाता है। उन्होंने चेतावनी दी कि फोरेंसिक जांच के तकनीकी चक्कर में महाराष्ट्र की जनता को न घुमाया जाए। महाराष्ट्र को जो समझना था, वह समझ चुका है और मुख्यमंत्री को अब निष्पक्षता से कार्रवाई करके दिखानी चाहिए।