Jayant Patil On Finance Minister Offer: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के आधिकारिक आवास 'वर्षा' पर देर रात हुई मुलाकात के बाद महाराष्ट्र के सियासी गलियारों में फैली तरह-तरह की अटकलों और अफवाहों पर आखिरकार राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल ने अपनी चुप्पी तोड़ दी है।
गुरुवार को एक विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए जयंत पाटिल ने इन सभी खबरों को पूरी तरह से काल्पनिक और बेबुनियाद करार दिया, जिनमें दावा किया जा रहा था कि वे पाला बदलकर महायुति सरकार में शामिल होने जा रहे हैं या उन्हें राज्य का अगला वित्त मंत्री बनाया जा सकता है। उन्होंने बेहद साफ शब्दों में कहा कि उनका गुट पूरी तरह से शरद पवार के नेतृत्व में एकजुट है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब पत्रकारों ने जयंत पाटिल से सीधे सवाल किया कि आखिर वे देर रात मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मिलने क्यों पहुंचे थे और बंद कमरे में क्या बात हुई? इस पर जवाब देते हुए पाटिल ने कहा, "मैं पूरी तरह से अपने निर्वाचन क्षेत्र के एक बेहद साधारण और जरूरी काम के सिलसिले में मुख्यमंत्री से मिलने गया था। मेरे क्षेत्र के कुछ लोगों को साल 2002-03 से अतिक्रमण का कोई नोटिस नहीं मिला था, फिर भी उनके खिलाफ शिकायत दर्ज की गई थी। इसी विषय पर चर्चा के लिए मैंने समय मांगा था।"
उन्होंने आगे स्पष्ट किया, "चूंकि मुख्यमंत्री कल दिनभर कई बैठकों में व्यस्त थे, इसलिए मुझे उनसे मिलने में देरी हुई। हमारी बातचीत केवल 5 से 10 मिनट ही चली और मुख्यमंत्री ने मामले को देखने का आश्वासन दिया है।"
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जयंत पाटिल ने उन मीडिया रिपोर्ट्स को भी सिरे से खारिज कर दिया जिसमें दावा किया गया था कि वर्षा बंगले पर उनकी मुलाकात प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे से हुई थी। उन्होंने कहा, "मैं प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे से वहां बिल्कुल नहीं मिला। यदि ऐसी कोई मुलाकात हुई होती तो मैं खुद खुलेआम स्वीकार करता। हमारे बीच किसी तरह के राजनीतिक विलय या गठबंधन को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई है।"
दोनों एनसीपी के विलय को लेकर चल रही चर्चाओं पर उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अजित दादा के जाने के बाद इस तरह की चर्चाओं का कोई आधार नहीं रह गया है और ये पूरी तरह से बंद हो चुकी हैं।
जब पत्रकारों ने उनसे चुटकी लेते हुए पूछा कि क्या आपको महाराष्ट्र का अगला वित्त मंत्री बनाने का कोई प्रस्ताव मिला है? इस पर जयंत पाटिल पहले तो जोर से हँसे और फिर मुस्कुराते हुए बोले, "मैंने तो अभी तक इस बारे में कुछ सोचा ही नहीं है, फिर आप लोग आगे की इतनी लंबी योजना क्यों बना रहे हैं?"
उन्होंने आगे कहा, "मंत्रिमंडल में विभागों का आवंटन करना मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का विशेषाधिकार है। आप लोग बहुत आगे की बातें सोच रहे हैं। हम सभी साथी पूरी ताकत के साथ आदरणीय शरद पवार के साथ खड़े हैं। मुझे बेहद दुख होता है कि इस तरह की भ्रामक चर्चाएं बार-बार मीडिया में क्यों उछाली जाती हैं।" वहीं भाजपा नेता विनोद तावड़े से हुई मुलाकात को लेकर उन्होंने स्पष्ट किया कि वह एक संसदीय कार्यक्रम के दौरान केवल एक शिष्टाचार कॉफी बैठक थी, जिसका कोई राजनीतिक अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए।