मुंबई: राजनीति में शब्दों के तीर अकसर चुनावी गर्मी के साथ तेज़ हो जाते हैं। लेकिन इस बार मामला सिर्फ बयानबाज़ी तक नहीं रुका चुनाव प्रक्रिया पर सवाल, मतदाता सूची में गड़बड़ी का आरोप, और सोशल मीडिया पर सीधे मुख्यमंत्री पर निशाना किया गया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के आरोपों ने जहां बीजेपी को कटघरे में खड़ा किया, वहीं पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने तीखा और व्यंग्यात्मक जवाब देकर राजनीतिक पारा चढ़ा दिया है।
राहुल गांधी ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर एक पोस्ट साझा करते हुए दावा किया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के विधानसभा क्षेत्र नागपुर दक्षिण-पश्चिम में सिर्फ पांच महीनों में मतदाता संख्या में 8% की अचानक बढ़ोतरी हुई है। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव के दिन कई मतदान केंद्रों पर 20% से लेकर 50% तक वोटर संख्या बढ़ी, जो पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है। राहुल गांधी ने इस मामले में न्यूजलॉन्ड्री नामक वेबसाइट की रिपोर्ट का हवाला देते हुए इसे "मतदाता सूची घोटाला" करार दिया।
फडणवीस का जवाब “झूठ बोले कौवा काटे, मगर आपके तीर हर बार हवा में क्यों जाते हैं?” राहुल गांधी के तीखे आरोपों के जवाब में देवेंद्र फडणवीस ने एक बेहद तंज भरा ट्वीट किया "झूठ बोले कौवा काटे, काले कौवे से डरिए... राहुल गांधी, महाराष्ट्र में हार के कारण आपकी बेचैनी समझ सकता हूं, लेकिन कब तक बिना तथ्य हवा में तीर चलाते रहेंगे?" उन्होंने कहा कि मतदाता वृद्धि कोई अपवाद नहीं, बल्कि सामान्य प्रक्रिया है, और महाराष्ट्र के 25 से अधिक विधानसभा क्षेत्रों में ऐसा हुआ है, जिनमें कई सीटें कांग्रेस और सहयोगी दलों ने जीती हैं।
फडणवीस ने आंकड़ों के साथ राहुल गांधी के आरोपों की हवा निकालने की कोशिश की नागपुर पश्चिम – 7% वोटर वृद्धि (27,065), कांग्रेस के विकास ठाकरे विजयी हो गये। नागपुर उत्तर – 7% वृद्धि (29,348), कांग्रेस के नितिन राऊत विजयी हुए। वडगांव शेरी (पुणे) – 10% (50,911), राष्ट्रवादी के बापूसाहेब पठारे जीते। मालाड पश्चिम (मुंबई) – 11% (38,625), कांग्रेस के असलम शेख विजयी बनाया । मुंब्रा – 9% (46,041), राष्ट्रवादी के जितेंद्र आव्हाड विजयी हुए। उन्होंने चुटकी लेते हुए लिखा "अगर राहुल गांधी ने ये आरोप लगाने से पहले अपने ही नेताओं से बात कर ली होती, तो इस तरह की फज़ीहत नहीं होती।"
राहुल गांधी का कहना है कि यह केवल नागपुर की बात नहीं, बल्कि एक व्यापक पैटर्न है, जहां मतदाता सूची के साथ सुनियोजित छेड़छाड़ की गई है। वहीं बीजेपी इसे कांग्रेस की राजनीतिक हताशा और भ्रम फैलाने की कोशिश बता रही है। फडणवीस ने यह भी संकेत दिया कि अगर मतदाता वृद्धि को घोटाला कहा जाए, तो कांग्रेस की कई सीटें भी सवालों के घेरे में आ जाएंगी।
इस जुबानी जंग के बीच अब सबसे बड़ा सवाल है। क्या चुनाव आयोग राहुल गांधी के आरोपों और फडणवीस की सफाई पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया देगा? क्या सचमुच वोटर लिस्ट में गड़बड़ी हुई है या यह सिर्फ राजनीतिक माइंड गेम है?
जहां राहुल गांधी अपने तेवर और डेटा के साथ चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं फडणवीस इसे “फैक्ट्स के बिना बयानबाज़ी” करार दे रहे हैं। दोनों ही पक्ष अपनी-अपनी बात पर अडिग हैं और अब फैसला जनता और आयोग के हाथ में है।