Rahul Narvekar Reprimands Ministers (फोटो क्रेडिट-X)  
मुंबई

Maharashtra Assembly Budget: राहुल नार्वेकर ने खुद सरकार के दो मंत्रियों को कड़ी फटकार लगाई, जानें क्यों?

Rahul Narvekar Reprimands Ministers: महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने मनरेगा और निधि के मुद्दों पर स्पष्ट जवाब न देने के लिए मंत्रियों भरत गोगावले और अशोक उईके को फटकारा।

अनिल सिंह

MGNREGA Wages Issue Maharashtra: महाराष्ट्र विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सत्ताधारी महायुती सरकार को उस वक्त असहज स्थिति का सामना करना पड़ा, जब विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने खुद सरकार के दो मंत्रियों को कड़ी फटकार लगाई। विपक्ष के हमलावर रुख के बीच, रोजगार गारंटी मंत्री भरत गोगावले और आदिवासी विकास मंत्री डॉ. अशोक उईके द्वारा दिए गए 'अस्पष्ट' (मोघम) जवाबों पर अध्यक्ष ने नाराजगी जताई।

यह घटना तब हुई जब मनरेगा (MGNREGA) के तहत मजदूरों की बकाया मजदूरी और रोजगार सेवकों को काम से निकाले जाने के मुद्दे पर सदन में गरमागरम बहस चल रही थी। अध्यक्ष नार्वेकर ने मंत्रियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि वे टालमटोल वाले जवाब देने के बजाय ठोस जानकारी सदन के पटल पर रखें।

मनरेगा मजदूरी और रोजगार सेवकों का निलंबन

विधायक मनोज कायंदे ने विधानसभा में केंद्र सरकार की महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत मजुरी के भुगतान में हो रही देरी का मुद्दा उठाया। उन्होंने सरकार से पूछा कि मजदूरों का बकाया पैसा कब तक मिलेगा? इस पर मंत्री भरत गोगावले ने जवाब दिया कि केंद्र सरकार से निधि प्राप्त करने के लिए "अनुवर्ती कार्रवाई" (Follow-up) चल रही है और पैसा मिलते ही वितरित कर दिया जाएगा। हालांकि, विपक्ष के नेता विजय वडेट्टीवार ने आरोप लगाया कि फंड की कमी के कारण राज्य में 3.12 लाख काम बंद पड़ गए हैं और हक मांगने वाले रोजगार सेवकों को नौकरी से निकाला जा रहा है।

चंद्रपुर में आंदोलनकारियों पर 'अन्याय' का मुद्दा

विजय वडेट्टीवार ने विशेष रूप से चंद्रपुर जिले का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां 19 रोजगार सेवकों को केवल इसलिए काम से हटा दिया गया क्योंकि उन्होंने अपने अधिकारों के लिए आंदोलन में हिस्सा लिया था। उन्होंने सवाल किया कि 20 साल से सेवा दे रहे कर्मचारियों को शासन किस अधिकार से निकाल रहा है? वडेट्टीवार ने इसे पूरी तरह से अन्यायपूर्ण निर्णय बताया। मंत्रियों के पास इन विशिष्ट सवालों के ठोस जवाब न होने के कारण सदन में काफी देर तक हंगामा होता रहा, जिससे सत्ता पक्ष की किरकिरी हुई।

विधानसभा अध्यक्ष के कड़े निर्देश और फटकार

मंत्रियों की 'टालमटोल' वाली शैली से नाराज होकर विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने मंत्री भरत गोगावले और डॉ. अशोक उईके को फटकार लगाते हुए कहा कि सदन को इस तरह के गोलमोल जवाब नहीं दिए जा सकते। नार्वेकर ने सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए कि केंद्र सरकार से कितना फंड आना शेष है और वह कब तक उपलब्ध होगा, इसकी पूरी विस्तृत रिपोर्ट इसी सत्र के समाप्त होने से पहले सदन के सामने पेश की जाए। अध्यक्ष की इन 'कानपिचक्या' (चेतावनी) के बाद मंत्रियों की सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई।

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