(कॉन्सेप्ट फोटो) 
महाराष्ट्र

बेलगावी को केंद्र शासित प्रदेश बनाने की क्यों उठी मांग, जानिए क्या है विवाद?

कर्नाटक की सिद्दारमैया सरकार ने महाराष्ट्र एककीकरण समिति की ओर से बेलगावी में आयोजित होने वाले वार्षिक मराठी सम्मलेन पर पाबंदी लगा दी है। इसके बाद बेलगावी विवाद को लेकर महाराष्ट्र और कर्नाटक में तल्खी बढ़ गई है।

आकाश मसने

मुंबई: महाराष्ट्र में हुए विधानसभा चुनावों में विपक्षी गठबंधन महा विकास अघाड़ी (MVA) की हार के बाद सहयोगी दलों में खटपट शुरू हो गई है। पहले सपा विधायक अबू आजमी ने एमवीए से नाता तोड़ने का ऐलान किया तो अब कर्नाटक की सिद्दारमैया सरकार ने एक ऐसा कदम उठाया है, जिससे कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) के संबंधों में भी तल्खी बढ़ सकती है। इसके साथ ही महाराष्ट्र और कर्नाटक दोनों राज्यों के बीच भी बेलगावी को लेकर चल रहा विवाद तूल पकड़ने लगा है।

दरअसल, कर्नाटक की सिद्दारमैया सरकार ने महाराष्ट्र एककीकरण समिति की ओर से सोमवार को बेलगावी में आयोजित होने वाले वार्षिक मराठी सम्मलेन पर इस साल पाबंदी लगा दी है। साथ ही राज्य की कांग्रेस सरकार ने कांग्रेस सरकार ने महाराष्ट्र से नेताओं के आने पर भी रोक लगा दी है।

बता दें कि महाराष्ट्र एकीकरण समिति ने साल 2006 में वार्षिक मराठी सम्मलेन के आयोजन की शुरुआत की थी। तभी से कर्नाटक ने दोनों राज्यों के बीच सीमा विवाद के बीच विधानसभा का शीतकालीन सत्र बेलगावी में आयोजित करना भी शुरू किया था।

क्या है बेलगावी का विवाद?

कर्नाटक और महाराष्ट्र के बीच बेलगावी को लेकर साल 1956 से राज्यों के पुनर्गठन के समय से विवाद चल रहा है। भाषाई आधार पर राज्यों के पुनर्गठन अधिनियम के तहत, बेलगावी (तब का बेलगाम) और इसके आसपास के मराठी भाषी क्षेत्रों को कर्नाटक में शामिल कर दिया गया। इसलिए महाराष्ट्र का दावा है कि मराठी भाषी बहुल क्षेत्र होने की वजह से बेलगावी को महाराष्ट्र में शामिल किया जाना चाहिए।

महाजन आयोग की रिपोर्ट को महाराष्ट्र ने नहीं माना

इस विवाद को सुलझाने के लिए सन 1966 में महाजन आयोग का गठन किया गया। महाजन आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कुछ गांवों को महाराष्ट्र में शामिल करने और बेलगाम को कर्नाटक में ही रहने देने की सिफारिश की।इस रिपोर्ट को कर्नाटक ने स्वीकार कर लिया, लेकिन महाराष्ट्र इसे मानने से मना कर दिया। तब से चल रहा यह विवाद आज तक सुलझ नहीं पाया है। दोनों राज्य बेलगाम पर अपना दावा करते रहे हैं। देश की खबरें पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें 

राजनीतिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण

जानकारी के लिए बता दें कि इस विवाद का बढ़ने का सबसे बड़ा कारण बेलगाम का राजनीतिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होना है। कर्नाटक ने इसे 'बेलगावी' नाम देकर पूरी तरह से अपने में समाहित करने की कोशिश की। लेकिन महाराष्ट्र ने 2004 में इस विवाद को सुलझाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दी, लेकिन अभी तक अंतिम फैसला नहीं आया है।

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