Highlights:
जालना जिले में अपर्याप्त और अनियमित बारिश के कारण सूखे जैसी स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने जल संरक्षण के निर्देश जारी किए।
जिलाधिकारी आशिमा मित्तल ने पेयजल के अनावश्यक उपयोग पर रोक लगाने और जलापूर्ति व्यवस्था में रिसाव रोकने के आदेश दिए।
पेयजल का उपयोग पीने, भोजन पकाने, स्वच्छता, स्वास्थ्य सेवाओं, अग्निशमन और पशुधन की जरूरतों को प्राथमिकता देकर करने को कहा गया।
Jalna Drought Situation 2026: जालना जिले में अपर्याप्त और अनियमित बारिश के कारण उत्पन्न सूखे जैसी स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने जल संरक्षण के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं। जिलाधिकारी एवं जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की अध्यक्ष आशिमा मित्तल ने पेयजल के अनावश्यक उपयोग पर रोक लगाने, जलापूर्ति व्यवस्था में रिसाव रोकने और शोधित अपशिष्ट जल के पुनः उपयोग को बढ़ावा देने के आदेश दिए हैं। ये निर्देश खरीफ सीजन 2026 के दौरान सूखा आकलन के तहत 'ट्रिगर-1' लागू लागू तहसीलों तहसा में प्रभावी होंगे।
जिलाधिकारी कार्यालय की ओर से 21 अक्टूबर को जारी आदेश में कहा गया है कि घटते भूजल स्तर और उपलब्ध जलस्त्रोतों पर बढ़ते दबाव के कारण पेयजल का संरक्षण आवश्यक हो गया है। सरकारी एवं अर्धसरकारी कार्यालयों, स्थानीय निकायों, शिक्षण संस्थानों, निजी प्रतिष्ठानों, निर्माण व्यवसायियों, ठेकेदारों और जलापूर्ति एजेंसियों को इन निर्देशों का पालन करना होगा।
प्रशासन ने पीने, भोजन पकाने, व्यक्तिगत एवं परिसर की स्वच्छता, स्वास्थ्य सेवाओं, अग्निशमन और पशुधन की जरूरतों को प्राथमिकता देने को कहा है। निर्माण कार्य, वाहनों की धुलाई, सड़क सफाई और अन्य गैर-पेयजल गतिविधियों के लिए जलस्रोतों का इस्तेमाल करने के निर्देश दिए गए हैं।
आरओ और जलशुद्धिकरण केंद्रों को शुद्धिकरण प्रक्रिया के दौरान निकलने वाले रिजेक्ट वाटर का पुनः उपयोग करना होगा। ऐसा संभव नहीं होने पर निस्तारण किया जाएगा। वाहन धुलाई प्रतिष्ठानों को भी सार्वजनिक जलापूर्ति योजनाओं के पेयजल का अनावश्यक इस्तेमाल रोकने और जल बचत के उपाय अपनाने होंगे।
महानगरपालिका, नगर परिषदों और नगर पंचायतों को जलापूर्ति पाइपलाइनों, नलों तथा टंकियों की लीकेज तत्काल दुरुस्त करने और नियमित रखरखाव सुनिश्चित करने को कहा गया है। स्थानीय निकायों को उपलब्ध शोधित अपशिष्ट जल के सुरक्षित पुनः उपयोग की योजना भी तैयार करनी होगी।
सरकारी और निजी टैंकरों से जलापूर्ति के दौरान टंकियों, वाल्व और पाइप की स्थिति की जांच अनिवार्य होगी, परिवहन के दौरान पानी का रिसाव या बर्बादी पाए जाने पर संबंधित कर्मचारियों, आपूर्तिकर्ताओं और ठेकेदारों की जिम्मेदारी तय की जाएगी।