Gondia Agricultural Impact News: इटियाडोह परियोजना के तहत सिंचाई के लिए बनाई गई प्रमुख नहर आज गंभीर स्थिति में पहुंच गई है। यह नहर मध्यप्रदेश सरकार के नियंत्रण में संचालित होती है और इसके माध्यम से महाराष्ट्र तथा मध्यप्रदेश दोनों राज्यों के किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया जाता है। लेकिन पिछले लगभग 20 वर्षों से इस नहर की उचित देखभाल और मरम्मत नहीं की गई है।
जानकारी के अनुसार, नहर की देखरेख के लिए नियुक्त कई मजदूरों की सेवाएं समाप्त कर दी गई, जबकि कुछ कर्मचारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं। उनकी जगह पर नए पदों पर भर्ती अब तक नहीं की गई है। इस कारण नहर की नियमित देखरेख पूरी तरह से प्रभावित हो गई है और स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। देखभाल के अभाव में नहर के दोनों किनारों पर बड़े-बड़े पेड और झाड़ियां आई हैं। कई स्थानों पर गहरे गड्ढे भी बन गए हैं, जिससे नहर की संरचना कमजोर हो रही है।
पानी के दबाव के समय इन कमजोरियों के कारण नहर के टूटने का खतरा बढ़ गया है।
स्थानीय किसानों का कहना है कि यदि समय रहते नहर की मरम्मत नहीं की गई और इसमें पानी छोड़ा गया, तो नहर के टूटने की संभावना से भारी नुकसान हो सकता है। इससे न केवल फसलें प्रभावित होंगी बल्कि आसपास के क्षेत्रों में बाढ़ जैसी स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है। यह नहर क्षेत्र की कृषि व्यवस्था की रीढ़ मानी जाती है।
महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के कई गांवों की खेती इसी नहर के पानी पर निर्भर है। यदि पानी की आपूर्ति बाधित होती है, तो किसानों की फसल उत्पादन क्षमता पर गंभीर असर पड़ेगा और कृषि संकट गहरा सकता है। प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांगक्षेत्रीय किसानों ने संबंधित विभाग से नहर की तत्काल जांच कर मरम्मत, सफाई और मजबूतीकरण का कार्य शुरु करने की मांग की है।
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साथ ही खाली पड़े पदों पर नियुक्तियां करने की भी मांग की गई है, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो। किसानों का यह भी कहना है कि समय रहते कार्रवाई नहीं होने पर सिंचाई व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो सकती है।