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गड़चिरोली जिले में न्यायालयीन कर्मचारियों के आंदोलन का दूसरा चरण शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
कर्मचारियों ने 16 और 17 अक्टूबर को हाथों पर काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराया।
सेवानिवृत्त न्यायालयीन कर्मचारियों ने 17 अक्टूबर को जिलाधिकारी कार्यालय के सामने दिनभर धरना दिया।
Gadchiroli Court Employees Protest: समान काम, समान वेतन की मांग को लेकर राज्यभर में चल रहे न्यायालयीन कर्मचारियों के आंदोलन का दूसरा चरण गड़चिरोली जिले में शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। इस दौरान जिले के सभी न्यायालयीन कर्मचारियों ने 16 और 17 अक्टूबर को हाथों पर काली पट्टी बांधकर काम किया। वहीं, सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने 17 अक्टूबर को जिलाधिकारी कार्यालय के सामने दिनभर धरना देकर अपनी मांगों की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित किया।
महाराष्ट्र न्यायालयीन कर्मचारी महासंघ के अनुसार, अधीनस्थ न्यायालयों के कर्मचारियों को उच्च न्यायालय के कर्मचारियों के समान वेतन देने के संबंध में उच्च न्यायालय ने प्रस्ताव मंजूर कर शासन के पास भेजा है। हालांकि, यह प्रस्ताव 31 जनवरी 2025 से सरकारी स्तर पर लंबित है। इसी मांग पर सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए महासंघ ने चरणबद्ध आंदोलन की रूपरेखा तैयार की है।
महासंघ की निर्धारित रूपरेखा के अनुसार, 16 सितंबर 2026 को आंदोलन का पहला चरण आयोजित किया गया था। इसके सरकार की ओर से मांग पर कोई कार्रवाई नहीं किए जाने के कारण दूसरे चरण का आंदोलन शुरू किया गया। इसके तहत गड़चिरोली जिले के सभी न्यायालयीन कर्मचारियों ने 16 और 17 अक्टूबर को काली पट्टी बांधकर शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराया। कर्मचारियों ने इस दौरान न्यायालयीन कामकाज प्रभावित न हो, इसका विशेष ध्यान रखा।
इस आंदोलन को सेवानिवृत्त न्यायालयीन कर्मचारियों का भी समर्थन मिला। जिले से सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों ने 17 अक्टूबर को गड़चिरोली जिलाधिकारी कार्यालय के सामने दिनभर धरना दिया। उन्होंने सरकार से न्यायालयीन कर्मचारियों की समान काम, समान वेतन की मांग पर सकारात्मक विचार कर इसे जल्द से जल्द मंजूरी देने की अपेक्षा जताई।
महाराष्ट्र न्यायालयीन कर्मचारी महासंघ की ओर से चेतावनी दी गई है कि यदि सरकार ने मांग स्वीकार नहीं की, तो 5 नवंबर को राज्य के सभी न्यायिक कर्मचारी सामूहिक अवकाश पर जाएंगे। इसी दिन सेवानिवृत्त कर्मचारी भी जिलाधिकारी कार्यालय के सामने दोबारा एक दिवसीय धरना आंदोलन करेंगे। न्यायालयीन कर्मचारियों की इस मांग और आगामी आंदोलन को लेकर अब सरकार की भूमिका पर ध्यान केंद्रित है।