महाराष्ट्र के अतिवृष्टि राहत पैकेज में से ₹17,000 करोड़ वितरित।
₹5,000 करोड़ के फसल बीमा लक्ष्य के मुकाबले किसानों को मिले ₹1,940 करोड़।
घोषित सहायता और किसानों तक पहुंची राशि में बड़ा अंतर।
Maharashtra Heavy Rain Relief Package: महाराष्ट्र में अतिवृष्टि से प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए घोषित पैकेज की पूरी राशि अब तक वितरित नहीं हो पाई है। अक्टूबर 2025 में राज्य सरकार ने किसानों के लिए 31,628 करोड़ रुपये के राहत पैकेज की घोषणा की थी।
हालांकि, राहत एवं पुनर्वास विभाग के अनुसार, इसमें से अब तक करीब 17,000 करोड़ रुपये ही वितरित किए गए हैं। वहीं, खरीफ 2025 के फसल बीमा भुगतान के आंकड़े भी घोषित सहायता और किसानों तक पहुंची राशि के बीच अंतर दर्शाते हैं।
राहत एवं पुनर्वास विभाग के अनुसार, पैकेज के तहत फसल और कृषि भूमि के नुकसान की भरपाई, बीज एवं खाद सहायता तथा अनुग्रह अनुदान के लिए लगभग 21,000 करोड़ रुपये के प्रावधान संबंधी शासनादेश जारी किए गए।
इनमें से करीब 17,000 करोड़ रुपये किसानों और प्रभावित लाभार्थियों को वितरित किए जा चुके हैं। शेष राशि के वितरण की स्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
राहत पैकेज की शेष लगभग 10,000 करोड़ रुपये की राशि बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण और मरम्मत के लिए निर्धारित की गई है। इसमें अतिवृष्टि से प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक पुनर्वास और मरम्मत कार्यों पर खर्च किया जाना है। इस प्रकार, घोषित पैकेज की राशि अलग-अलग मदों में निर्धारित की गई है।
खरीफ 2025 के लिए फसल बीमा के तहत कम से कम 5,000 करोड़ रुपये देने की घोषणा की गई थी। इसके मुकाबले किसानों के बैंक खातों में अब तक केवल 1,940 करोड़ रुपये जमा होने की जानकारी दी गई है। इससे घोषित बीमा सहायता और वास्तविक भुगतान के बीच बड़ा अंतर सामने आया है।
छत्रपति संभाजीनगर जिले की वैजापुर तहसील के बाभुलगांव खुर्द के किसान गोरख तुपे और भागीनाथ काकड़े की परेशानी इस संकट को दर्शाती है। पिछले साल हुई अतिवृष्टि के दौरान दोनों किसानों के खेतों की मिट्टी बह गई थी, जिससे उनकी कृषि भूमि प्रभावित हुई।
भारतीय किसान सभा के राज्य सचिव डॉ. अजित नवले के अनुसार, किसानों तक पहुंची सहायता करीब 17,000 से 18,000 करोड़ रुपये तक ही रही है। राहत पैकेज के शेष वितरण और फसल बीमा भुगतान की स्थिति पर अब किसानों की नजर है। प्रभावित किसानों के लिए समय पर सहायता पहुंचाना इस मामले का प्रमुख मुद्दा बना हुआ है।