Chandrapur Water Crisis Gondpipri Tehsil Har Ghar Jal Yojana: शासन की ओर से 'हर घर जल' योजना के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन चंद्रपुर जिले की गोंडपिपरी तहसील के हेटी नांदगांव, चक नांदगांव और टोले नांदगांव के लोग आज भी भीषण जलसंकट से जूझ रहे हैं। लगभग 47 डिग्री सेल्सियस तापमान में महिलाओं को पीने के पानी के लिए रोजाना नाले में गड्ढे खोदने पड़ रहे हैं। इन गांवों की स्थिति विकास के दावों पर सवाल खड़े कर रही है। गांवों में नल तो हैं, लेकिन उनमें पानी नहीं आता।
कुएं मौजूद हैं, मगर उनका पानी खारा होने के कारण पीने योग्य नहीं है। ऐसे में ग्रामीणों को गांव से लगभग एक किलोमीटर दूर सूखे नाले पर निर्भर रहना पड़ रहा है। जमीन खोदकर निकाल रहे पानी हर सुबह महिलाओं की पानी के लिए जद्दोजहद शुरू हो जाती है। वे नाले की रेत में गड्ढे खोदती हैं और जमीन से रिसकर आने वाले पानी का इंतजार करती हैं। ऊपर की मिट्टी और गंदगी हटाने के बाद जो थोड़ा साफ पानी दिखाई देता है, उसे घड़ों में भरकर घर ले जाया जाता है।
एक घड़ा भरने में करीब 15 मिनट लग जाते हैं। गड्डे का पानी खत्म होने पर फिर से पानी भरने का इंतजार करना पड़ता है। गर्मी बढ़ने के साथ स्थिति और गंभीर होती जा रही है। मई महीने में भूजल और नीचे चले जाने से महिलाओं को आठ फीट तक गहरे गड्ढे खोदने पड़ रहे हैं। चंद्रपुर भीषण गर्मी और तपती जमीन पर घंटों तक चलने वाला यह संघर्ष ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है।
चंद्रपुर ग्रामीणों के अनुसार यह समस्या नई नहीं है, बल्कि कई पीढ़ियों से यही स्थिति बनी हुई है। सरकारें बदली, योजनाएं आईं और घोषणाएं हुई, लेकिन गांवों की प्यास नहीं बुझी। कुछ वर्ष पहले यहां प्रादेशिक नल जल योजना के तहत पाइपलाइन और नल लगाए गए थे। कागजों में सात गांवों तक पानी पहुंचने का दावा किया गया, लेकिन वास्तव में इन तीन गांवों में नियमित जलापूर्ति नहीं हो रही है। कई घरों में नल लगे होने के बावजूद उनमें कभी पानी नहीं आया। कुछ जगहों पर आने वाला पानी दूषित होने के कारण ग्रामीण उसका उपयोग पीने के लिए नहीं करते।
दो वर्ष पहले गांव के बाहर नाले के पास दो नई पानी टंकियों का निर्माण शुरू किया गया था, लेकिन वह काम अधूरा छोड़ दिया गया। आज भी अधूरी टंकियां प्रशासन की अनदेखी की गवाही दे रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने कई बार प्रशासन से शिकायत की और अधिकारियों के चक्कर लगाए, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। कुएं का खारा पानी केवल नहाने, कपड़े धोने और बर्तन साफ करने के लिए उपयोग किया जाता है, जबकि पीने के लिए आज भी नाले के पानी पर निर्भर रहना पड़ता है।
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"मैं बचपन से इसी गांव में रह रही हूं। तब से गांव की यही स्थिति है। पहले मैं खुद दो किलोमीटर दूर से पानी लाती थी। अब घर की अगली पीढ़ी भी वही कर रही है। इतने वर्षों बाद भी गांव की प्यास नहीं बुझी।- "ताराबाई येलमुले, ग्रामवासी
बेटी की शादी के समय घर में पानी की एक बूंद भी नहीं थी। घर में नल कनेक्शन है, लेकिन उसमें कभी पानी नहीं आया। शादी के लिए बाहर से टैंकर मंगवाना पड़ा। बचपन से हम यही स्थिति देख रहे हैं।" - देवराव येलमुले