New Faces In Politics:चंद्रपुर नगर निगम चुनाव (सोर्सः सोशल मीडिया) 
चंद्रपुर

चंद्रपुर नगर निगम चुनाव: 74% नए चेहरे, 49 नए पार्षदों की जीत

New Faces In Politics: चंद्रपुर नगर निगम चुनाव में 74% नए चेहरे जीतकर पार्षद बने हैं। 49 नए उम्मीदवारों को मतदाताओं ने मौका दिया, लेकिन अब इन नए पार्षदों के लिए विकास के वादे निभाने की चुनौती होगी।

आंचल लोखंडे

Chandrapur Municipal Corporation: बदलते राजनीतिक समीकरणों के कारण चंद्रपुर नगर निगम (मनपा) चुनाव में 49 नए उम्मीदवारों ने जीत हासिल की है। अब 74 प्रतिशत नए चेहरे शहर के विकास की राजनीति का हिस्सा बन चुके हैं, जबकि पूर्व पार्षदों के जीतने का आंकड़ा केवल 34 प्रतिशत है। कुल 49 नए पार्षदों में से केवल 17 पुराने चेहरों को जनता ने फिर से मौका दिया है। मतदाता अब इस बात पर ध्यान दे रहे हैं कि ये नए उम्मीदवार, जिनका स्थानीय स्वशासन का कोई अनुभव नहीं है, वे कैसे प्रदर्शन करेंगे।

नगर निगम चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के बीच टिकट बंटवारे को लेकर खींचतान चल रही थी। पार्टी के अंदर के विवादों के कारण पुराने कार्यकर्ताओं का टिकट काटकर नए उम्मीदवारों को मौका दिया गया। चुनाव प्रचार के दौरान कुछ मतभेदों के बावजूद, इन नए उम्मीदवारों को वरिष्ठ नेताओं का समर्थन मिला।

मतदाताओं ने युवा और जोशीले उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी

अपने-अपने वार्ड में मतदाताओं ने युवा और जोशीले उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी, और पहले प्रयास में ही 451 में से 49 नए उम्मीदवार पार्षद बन गए। इनमें से अधिकांश पार्षद 30 से 45 साल की उम्र के हैं, और भाजपा, कांग्रेस, उद्धव सेना, वंचित बहुजन अघाड़ी, भारतीय शेतकरी कामगार पार्टी और एआईएमआईएम के उम्मीदवार शामिल हैं। मतदाताओं ने अपनी पसंद जाहिर कर दी है, अब इन नए पार्षदों के लिए वादे निभाने की चुनौती है।

'दानव' सरनेम वाले दो पार्षद चंद्रपुर में पहुंचे

विट्ठल मंदिर ब प्रभाग के अनुभवी पूर्व पार्षद प्रशांत दानव, जिन्हें कांग्रेस ने टिकट नहीं दिया था, निर्दलीय के तौर पर जीते हैं। इसी वार्ड में भाजपा के युवा प्रत्याशी भालचंद्र दानव की जीत के साथ, 'दानव' सरनेम वाले दो पार्षद चंद्रपुर नगर निगम में पहुंच गए हैं।

पूर्व पार्षदों के अनुभव का महत्व

चंद्रपुर नगर निगम में अब 49 नए पार्षदों को संभालने की जिम्मेदारी 17 पूर्व पार्षदों को दी गई है, जिनका प्रशासन और राजनीति में अच्छा अनुभव है। इनमें सुभाष कासंगोटुवार, शीतल गुरनुले, जयश्री जुमड़े, संगीता भोयर, पुष्पा उराडे, राजलक्ष्मी करंगल, राजेश अड्डुर, पप्पू देशमुख, सविता कांबले, राहुल पावड़े, राहुल घोटेकर, संजय कंचरलावार, नंदू नागरकर, लता साव, वसंत देशमुख, संगीता खांडेकर और प्रशांत दानव शामिल हैं। इनमें से कुछ को जनता ने पहले भी अच्छा प्रदर्शन किया था, और अब इनपर नए पार्षदों को संभालने की जिम्मेदारी है।

नए पार्षदों को चुनौती: शहर विकास की राह आसान नहीं

अब जब 66 में से 49 नए पार्षद बन गए हैं, तो सवाल यह उठता है कि क्या ये नए चेहरे, जिनके पास अनुभव की कमी है, शहर के विकास को सही दिशा में ले जाएंगे? शहर विकास केवल सड़क, बिजली, पानी और नाली तक सीमित नहीं होता। क्या नए पार्षद अपने वादों को निभाने और ठोस काम करने में सक्षम होंगे? कुछ लोगों का मानना है कि इस स्थिति में अनुभवी नेताओं को ही नगर निगम की जिम्मेदारी संभालनी पड़ेगी।

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