आशा वर्कर्स आंदोलन (सोर्सः सोशल मीडिया)
चंद्रपुर

चंद्रपुर में 1500 आशा वर्कर्स और आंगनवाड़ी सेविकाओं का जेल भरो आंदोलन, 35 हजार न्यूनतम वेतन की मांग

ASHA Workers Protest: चंद्रपुर में करीब 1500 आशा वर्कर्स, आंगनवाड़ी सेविकाओं और अन्य श्रमिकों ने विभिन्न मांगों को लेकर जेल भरो आंदोलन किया। न्यूनतम वेतन और लंबित कोरोना भत्ता देने की मांग की।

आंचल लोखंडे

Chandrapur Jail Bharo Protest: लंबित कोरोना भत्ता अदा करने, श्रमिक विरोधी चार श्रम संहिताओं को रद्द करने, संविदा एवं योजना कर्मचारियों को स्थायी सेवा में शामिल करने तथा न्यूनतम वेतन 35 हजार रुपए लागू करने समेत विभिन्न मांगों को लेकर सोमवार को करीब डेढ़ हजार आशा वर्कर्स एवं आंगनवाड़ी सेविकाओं ने चंद्रपुर जिला परिषद कार्यालय पर धावा बोला। इस दौरान विभिन्न मांगों का ज्ञापन जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पुलकित सिंह को सौंपा गया।

संयुक्त किसान सभा, सीटू तथा समस्त श्रमिक संगठनों की ओर से देशव्यापी जेल भरो आंदोलन किया गया। चंद्रपुर में आयोजित इस आंदोलन में आंगनवाड़ी कर्मचारी, आशा वर्कर्स, बचत समूह की महिलाएं, थर्मल पावर स्टेशन के कर्मचारी, मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव तथा शालेय पोषण आहार कर्मचारियों सहित करीब डेढ़ हजार श्रमिक शामिल हुए।

23 हजार कोरोना भत्ता देने की मांग

आंदोलनकारी जिला परिषद परिसर में एकत्र हुए। इसके बाद महात्मा गांधी की प्रतिमा की परिक्रमा करते हुए मोर्चा पुनः जिला परिषद परिसर में पहुंचा। यहीं जेल भरो आंदोलन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने विभिन्न मांगों के समर्थन में जोरदार नारेबाजी कर सरकार का ध्यान आकर्षित किया।

इस अवसर पर मार्गदर्शन करते हुए कॉ, किशोर जामदार ने कहा कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए विद्यार्थी आंदोलन से युवाओं में बढ़ता असंतोष स्पष्ट दिखाई देता है। काम करवाकर उसका उचित मेहनताना नहीं देना गंभीर मामला है। आंगनवाड़ी कर्मचारियों एवं आशा वर्कर्स को अपने अधिकारों की मांग के लिए जेल भरो आंदोलन करना पड़े, यह सरकार के लिए दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है।

संविदा कर्मचारियों को स्थायी करने की मांग

राजेश पिंजरकर ने देश के विभिन्न मंदिरों में हुई चोरी की घटनाओं का उल्लेख करते हुए सरकार की कार्यप्रणाली पर निशाना साधा। वहीं अरुण भेलके ने आरोप लगाया कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बावजूद चार वर्ष बीत जाने के बाद भी आंगनवाड़ी कर्मचारियों को ग्रेच्युटी लाभ नहीं मिला है। संध्या खणके ने कहा कि मांगों को मंजूर कराने के लिए व्यापक संघर्ष की आवश्यकता है। विद्यार्थी आंदोलन ने भी संघर्ष की ताकत का परिचय दिया है, ऐसा उन्होंने कहा।

न्यूनतम वेतन 35000 रूपए करें

आंदोलन के दौरान किसानों को उनकी उपज का गारंटी भाव लागू करने, चारों श्रम संहिताओं को रद्द करने, संविदा एवं योजना कर्मचारियों को स्थायी करने, न्यूनतम वेतन 35 हजार रुपए लागू करने, सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के अनुसार ग्रेच्युटी का लाभदेने, समान काम के लिए समान वेतन देने, लंबित 23 हजार रुपए का कोरोना भत्ता अदा करने तथा योजना कर्मचारियों को भी पीएफ का लाभ देने सहित विभिन्न मांगें रखी गईं।

जेल भरो आंदोलन का हुआ समापन

आंदोलन को सफल बनाने के लिए विद्या निब्रड, प्रमोद गोडघाटे, वामन मेश्राम, गुजाबाई डोंगे, सायली बावणे, उषा येनूरकर, संध्या दुधे, संगीता डोरलीकर, गजानन इंगलवार, परशुराम तोडासे, अनिल येनकर, वंदना चव्हाण, विठोबा एकोणकार, प्रमोद जुपकवार आदि ने विशेष प्रयास किए। शारदा लेंगुरे के आभार प्रदर्शन के बाद जेल भरो आंदोलन का समापन हुआ।

बाघ और उदयगिरि गुफाओं को मिला UNESCO का साथ, भारत के 5 नए धरोहर स्थल अस्थायी सूची में शामिल

अंग्रेजों से हमने वोट का अधिकार छीना था, आज BJP लोकतंत्र को खोखला कर दिया; CWC की बैठक में खरगे ने रखी 5 मांगे

अरुणाचल में भारत-म्यांमार सीमा पर उग्रवादी हमला, असम राइफल्स का 1 जवान शहीद, 4 अन्य घायल

युद्ध अभ्यास 2026 की सफलता के बाद नई दिल्ली में बड़ी बैठक! भारतीय सेना प्रमुख और अमेरिकी जनरल के बीच अहम चर्चा

गृह मंत्रालय के दो अधिकारियों पर बड़ा एक्शन! दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने किया अरेस्ट, जांच में जुटी टीम