Bhandara Sakoli Police Station: भंडारा जिले में दिलीप सदाशिव कांबले की मारपीट के बाद उपचार के दौरान हुई मौत के मामले में साकोली पुलिस ने फरार सरपंच पुरुषोत्तम रुखमोडे के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 103 के तहत हत्या का मामला दर्ज किया है।
नागपुर से पोस्टमार्टम के बाद शव साकोली पहुंचने पर परमानंद मेश्राम सहित कार्यकर्ता शव लेकर पुलिस थाने पहुंचे और आरोपी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर तत्काल गिरफ्तारी की मांग की एसडीपीओ शिवम विसापुरे और थाना प्रभारी आचरेकर के साथ करीब ढाई घंटे जद्दोजहद के बाद पुलिस ने हत्या की धारा बढ़ाई, इसके बाद रात करीब 11 बजे शव खैरी गांव ले जाया गया, जहां दफनविधि कर अंतिम संस्कार किया गया।
उल्लेखनीय है कि 11 सितंबर 2026 को मारपीट में घायल दिलीप कांबले का उपचार चल रहा था। 21 सितंबर को उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। इस संबंध में साकोली थाने में अपराध दर्ज था। इसमें भारतीय न्याय संहिता की धारा 105 (गैर इरादतन हत्या), 351 (2) तथा अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम की धाराएं लगाई गई थीं।
भंडारा जिले में अस्मिता का एल्गार' संगठन के परमानंद मेश्राम ने पुलिस से आरोपी के खिलाफ हत्या की धारा बढ़ाकर तत्काल गिरफ्तारी की मांग की मेश्राम ने कहा कि 11 सितंबर की मारपीट से 21 सितंबर की मौत तक की घटनाओं की पूरी कड़ी की जांच होनी चाहिए। घटनास्थल, विवाद का कारण, मारपीट की अवधि, इस्तेमाल वस्तु, उपस्थित लोगों तथा प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज किए जाएं।
शुरुआत में किस दबाव के कारण मृत्यु की गलत जानकारी दी गई थी, इसकी जांच की मांग की गई। मृतक ने परिजनों, ग्रामीणों या चिकित्सकों को मारपीट के संबंध में क्या बताया था, इसका भी पता लगाने को कहा गया। पुलिस पाटील अजय घरड़े की भूमिका, घटनास्थल व आसपास के सीसीटीवी, आरोपी का मोबाइल स्थान, आवश्यक कॉल रिकॉर्ड तथा अन्य डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित करने की मांग की गई।
संगठन ने कहा कि आरोपी को मृतक की जाति की जानकारी पहले से थी, इससे जुड़े साक्ष्य भी जुटाए जाए, प्रतिनिधिमंडल में परमानंद मेश्राम, सचिन गेडाम, मदनपाल गोस्वामी, अमित वैद्य, राहुल शामकुवर, यादोराव गणवीर, मौरेश्वर गजभिये, कपिलाताई रामटेके, मंजूताई गजभिये, अमित शामकुवर, शब्बीर पठाण, भावेश कोटांगले, अमोल टेंभुर्णे और राहुल गजभिये शामिल थे।
नागपुर मेडिकल कॉलेज सहित सभी अस्पतालों के केस पेपर, एमएलसी, सीटी स्कैन, एमआरआई, एक्स-रे, ऑपरेशन व आईसीयू रिकॉर्ड, उपचार संबंधी दस्तावेज कब्जे में लेकर चिकित्सकीय साक्ष्यों की जांच करने की मांग की गई। पोस्टमार्टम चिकित्सकों से चोटों की प्रकृति, उनकी अवधि, मारपीट से संबंध तथा मृत्यु के कारण पर स्पष्ट राय लेने को कहा गया।