प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया AI ) 
औरंगाबाद

औद्योगिक विकास में महिलाओं की भूमिका पर CSM-RDA के समक्ष प्रस्तुति; महिला सशक्तिकरण की नई दिशा

Industrial Growth Maharashtra: संभाजीनगर महानगर क्षेत्र में औद्योगिक और शहरी विकास के तहत महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने के लिए अर्बन रिसर्च फाउंडेशन और सेफ्टीपिन ने अभिनव परियोजना का प्रस्ताव रखा।

अंकिता पटेल

Women Economic Participation: छत्रपति संभाजीनगर अर्बन रिसर्च फाउंडेशन और दिल्ली स्थित सेफ्टीपिन संस्था ने छत्रपति संभाजीनगर महानगर क्षेत्र प्राधिकरण (CSM-RDA) के समक्ष महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से एक अभिनव परियोजना का प्रस्ताव प्रस्तुत किया है।

इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य महानगर क्षेत्र में आगामी औद्योगिक और शहरी विकास की प्रक्रिया में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना है। इस संबंध में विभागीय आयुक्त कार्यालय में विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया गया।

इस अवसर पर विभागीय आयुक्त जितेंद्र पापलकर, महानगर नियोजनकार हर्षल बाविस्कर, तहसीलदार सुनंदा पारवे, साधना बांगर सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

अर्बन रिसर्च फाउंडेशन टियर-2 और टियर-3 शहरों में कार्य करने वाली अग्रणी संस्था है। वहीं सेफ्टीपिन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्यातिप्राप्त संगठन है।

प्रस्तुति के दौरान बताया गया कि महानगर क्षेत्र में प्रस्तावित टोयोटा किर्लोस्कर और अधर जैसी अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के आने से जो नए अवसर सृजित होंगे, उनमें महिलाओं की भागीदारी कैसे बढ़ाई जा सकती है। साथ ही इससे महाराष्ट्र और जिले के आर्थिक विकास को किस प्रकार गति मिल सकती है, इस पर भी प्रकाश डाला गया।

जरूरतों को परियोजना में शामिल करने का सुझाव

प्रस्तावित परियोजना के अंतर्गत विजन डॉक्युमेट और क्षेत्रीय विकास योजना (रीजनल प्लान) जैसी भविष्य की नियोजन प्रक्रियाओं में जेंडर सेंसिटिव यानी लिंग-संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने की सिफारिश की गई है। इसके अलावा महाराष्ट्र की चौथी महिला नीति सहित विभिन्न राष्ट्रीय और राज्यस्तरीय नीतियों में लिंगभाव के समावेश और उसके महत्व की जानकारी भी विभागीय आयुक्त जितेंद्र पापलकर को दी गई।

परियोजना में सुझाव

  • यदि यह परियोजना लागू होती है तो छत्रपति संभाजीनगर महानगर क्षेत्र प्राधिकरण देश का पहला और आग्रणी प्राधिकरण बनेगा।
  • प्रस्तुतीकरण के माध्यम से इससे होने वाले सामाजिक और आर्थिक लाभों को भी स्पष्ट किया गया।
  • परियोजना में डेटा संकलन और विश्लेषण, क्षमता निर्माण कार्यशालाएं, उद्योगों के साथ संवाद और अंतिम कार्य योजना तैयार करने जैसे बरण
  • शामिल होंगे।विभागीय आयुक्त जितेंद्र पापलकर ने इस प्रस्तुति की सराहना की।
  • उन्होंने शहरी क्षेत्री की महिलाओं के साथ-साथ प्राधिकरण क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों की महिलाओं की आकांक्षाओं और जरूरतों को भी परियोजना में शामिल करने का सुझाव दिया।
  • साथ ही इस संबंध में एक विस्तृत प्रस्ताव प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

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