अमरावती

Amravati News: कपास पर बोंडइल्ली का प्रकोप, तहसील के किसानों में छायी चिंता

नवभारत डेस्क

धामणगांव रेलवे (सं). इस साल कम बारिश के कारण किसानों को सोयाबीन की फसल में नुकसान उठाना पड़ा. लेकिन फसल कपास से भरपूर थी. परंतु अब देखा जा रहा है कि हरे-भरे कपास के खेतों पर बोंड इल्ली के हमले से क्षेत्र के किसान चिंतित हैं. 

पिछले वर्ष भी हुआ था नुकसान

पिछले साल भारी बारिश के कारण कई किसानों के खेतों में कपास की फसलें पीली पड़ गईं और सड़ गईं थी. सोयाबीन भी बह गई. हालांकि इस साल किसानों को उम्मीद थी कि इसमें बढ़ोतरी होगी. लेकिन फसल अभी भी अच्छी स्थिति में है. अल्प वर्षा के कारण कुछ किसानों ने अपने कुओं में उचित छिड़काव करके सिंचाई की और कपास की फसल को हरा-भरा रखा, लेकिन पिछले कुछ दिनों से इस क्षेत्र के किसान अपने खेतों में इल्ली के हमले से चिंतित हो गए हैं.

तहसील के अनेक गांवों में असर

इस क्षेत्र में मुख्य रूप से मंगरूल दस्तगीर, वासद, कावली, दाभाड़ा, गवने पानी, चिंचपुर शिडोडी, वाठोडा, जलगांव, गुंजी अशोक नगर के कुछ हिस्सों में किसानों का कहना है कि गांव में बड़ी संख्या में इल्ली आ गई है. एक ओर जहां कुछ किसानों का कहना है कि चूंकि इस फसल में काफी पैसा खर्च होता है, इसलिए लागत भी निकलना मुश्किल हो गया है. एक एकड़ की लागत आमतौर पर लगभग 25 हजार होती है. इसलिए कपास की लागत और श्रम लागत की गणना करना मुश्किल है. 

चने पर मर रोग का आक्रमण 

हर साल किसान के पीछे कोई न कोई संकट रहता है. रबी सीजन शुरू हो चुका है. उस सीजन में मुख्य रूप से गेहूं और चना बोया जाता है. मुख्य नकदी फसल बोई जाती है. सिंचाई भी अच्छे से हो रही है. वहीं दूसरी ओर जलवायु की वजह से चने पर मर रोग का आक्रमण हो गया है तो दूसरी और तुअर को मुख्य रूप से किसान की दूसरी नकदी फसल के रूप में लिया जाता है. 

तुअर पर भी असर

 इस क्षेत्र में बड़ी मात्रा में तुअर का उत्पादन होता है. लेकिन पिछले कुछ दिनों से तुअर पर भी हमला होने से यह कहां जा रहा है कि क्या तुअर की यह फसल बचेगी या नहीं? किसान के हाथ में होगा या नहीं यह भी चिंता का विषय बन गया है. एक तरफ प्रकृति की अनियमीतता और दूसरी तरफ सरकार की दो-तरफा नीति, ऐसे में किसान अपना सालाना खर्च कैसे चलाएं और संसार का रथ कैसे चलाएं, इस बात से कई किसान चिंतित है.

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