Amravati Municipal Corporation: अमरावती मनपा के करोड़ों रुपए के बहुचर्चित घनकचरा संकलन व परिवहन ठेके को लेकर मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए मनपा प्रशासन को करारा झटका दिया है। न्यायमूर्ति अनिल एस. किलोर और न्यायमूर्ति रजनीश आर. व्यास की पीठ ने बेंगलुरु की कंट्रैक्टर कंपनी 'पी. गोपीनाथ रेड्डी' की रिट याचिका को स्वीकार करते हुए मौजूदा कंट्रैक्टर उल्हासनगर की 'कोणार्क इंफ्रास्ट्रक्चर प्रा. लि.' और 'अर्बन एजेंसी' को नियमबाह्य तरीके से पात्र ठहराने वाले फैसले को असंवैधानिक करार दिया।
अदालत ने 28 नवंबर 2025 को कोणार्क कंपनी के साथ किए गए मनपा के बहुचर्चित करार को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है तथा दोनों कंपनियों को इस निविदा के लिए पूरी तरह से अयोग्य घोषित कर दिया है। इस फैसले के बाद अब शहर में सफाई, कचरा संकलन और परिवहन की कमान एकमात्र वैध और पात्र निविदाकार के रूप में उभरकर सामने आई 'पी. गोपीनाथ रेड्डी' कंपनी को सौंपे जाने का रास्ता साफ दिख रहा है।
हालांकि, मनपा प्रशासन के लिए यह आदेश एक गहरा प्रशासनिक संकट और गले की फांस बन गया है, क्योंकि मनपा की उच्चस्तरीय निविदा समिति की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। निविदा समिति की कार्यप्रणाली कठघरे में सुकली और अकोली कंपोस्ट डिपो तक शहर का कचरा पहुंचाने के लिए मनपा ने 8 अक्टूबर 2025 को निविदा आमंत्रित की थी। उस समय तत्कालीन मनपा आयुक्त सौम्या शर्मा, अतिरिक्त आयुक्त शिल्पा नाईक, उपायुक्त डॉ. मेघना वासनकर, वित्त व लेखापरीक्षक शामसुंदर देव और स्वच्छता अधिकारी डॉ. अजय जाधव की उच्चस्तरीय निविदा समिति ने नियमों को दरकिनार कर कोणार्क और अर्बन एजेंसी को पात्र ठहराया था।
नए वाहनों की शर्त और पुराने कर्ज का विवाद निविदा प्रक्रिया के दौरान प्रत्येक प्रभाग के लिए निर्धारित संख्या में बिल्कुल नए वाहन उपलब्ध कराना अनिवार्य था। याचिकाकर्ता पी. गोपीनाथ रेड्डी ने आरोप लगाया था कि कोणार्क कंपनी ने इस मुख्य शर्त का उल्लंघन किया और पुराने ठेकेदारों के उन वाहनों का उपयोग किया जिन पर बैंक लोन की किश्तें बाकी थीं। नियमों की इस अनदेखी को लेकर मनपा की आमसभाओं में भी विपक्षी पार्षदों और सदस्यों ने कई बार जोरदार हंगामा किया था, जिस पर अब हाईकोर्ट के निर्णय ने मुहर लगा दी है।
तीन सप्ताह की मोहलत और 'जैसे थे' स्थिति अदालत ने मनपा प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यदि कोई कानूनी रुकावट न हो, तो अगले 3 सप्ताह (21 दिन) के भीतर एकमात्र पात्र ठेकेदार पी. गोपीनाथ रेड्डी की निविदा पर नए सिरे से विचार कर अंतिम निर्णय लिया जाए।
वहीं, कोर्ट ने यह भी सुनिश्चित किया है कि प्रशासनिक फेरबदल के कारण शहर की सफाई व्यवस्था चरमरा न जाए। जब तक मनपा नए ठेकेदार या प्रक्रिया पर अंतिम मुहर नहीं लगाती, तब तक के लिए अस्थायी व्यवस्था के तौर पर कोणार्क कंपनी को ही कचरा संकलन और परिवहन का काम जारी रखने की अनुमति दी गई है। मनपा का विधि विभाग अब कानूनी विशेषज्ञों से सलाह लेकर अंतिम आदेश के विस्तृत अध्ययन के बाद आगे की कार्रवाई करेगा।