अहिल्यानगर में फायटर जेट से गिरा था जिंदा बम। (सौजन्यः सोशल मीडिया) 
अहमदनगर

Ahilyanagar News: अहिल्यानगर में फायटर जेट से गिरा था जिंदा बम, लगभग 1 महीने बाद सेना ने किया डिस्पोज़

राहुरी तालुका के वरवंडी में 24 मार्च को दोपहर के समय एक लड़ाकू विमान से एक जीवित बम गिर गया था। एक महीने बाद 30 अप्रैल को पुणे स्थित भारतीय सेना की बीडीएस (बम निरोधक दस्ता) टीम मौके पर पहुंची और बम को निष्क्रिय कर दिया।

आंचल लोखंडे

अहिल्यानगर: राहुरी तालुका के वरवंडी में 24 मार्च को दोपहर के समय एक लड़ाकू विमान से एक जीवित बम गिर गया था। एक महीने बाद 30 अप्रैल को पुणे स्थित भारतीय सेना की बीडीएस (बम निरोधक दस्ता) टीम मौके पर पहुंची और बम को निष्क्रिय कर दिया। सेना के अधिकारियों ने बताया कि बम को घटनास्थल से केके रेंज में ले जाया जाएगा और विस्फोट किया जाएगा।

तारीख 24 मार्च, 2025 को दोपहर के समय राहुरी तालुका के वरवंडी क्षेत्र में बांस परियोजना पर आसमान में उड़ते एक जेट विमान से एक जीवित बम गिरा। इससे भारी मात्रा में कंपन उत्पन्न हुआ। बम गिराए जाने के बाद वरवंडी क्षेत्र में भय का माहौल पैदा हो गया था। उस लावारिस बम को देखे हुए एक महीना हो गया है। क्षेत्र के निवासियों ने जिला कलेक्टर से मुलाकात की और बार-बार मामले की जानकारी ली। इसलिए जिला कलेक्टर ने दिल्ली में रक्षा विभाग को इस सूचना से अवगत कराया था।

जीवित बम को निकालने के लिए जेसीबी का इस्तेमाल

कल सुबह पुणे में भारतीय सेना के नायक सूबेदार प्रकाश कोटगी, हवलदार प्रमोद हनमंथा, हवलदार टी. कन्नन, कांस्टेबल बी. एन. राव की बम निरोधक टीम घटनास्थल पर पहुंची। टीम ने 7 फुट गहरे गड्ढे से जीवित बम को निकालने के लिए जेसीबी का इस्तेमाल किया। महात्मा फुले कृषि विश्वविद्यालय के सुरक्षा अधिकारी गोरक्षनाथ शेटे ने उनकी सहायता की। महाराष्ट्र की अन्य खबरें पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें

बम देखने के लिए भीड़ को इकट्ठा

इसके बाद पुलिस इंस्पेक्टर संजय ठेंग टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। नायक सूबेदार कोटगी ने केके रेंज के अधिकारियों से संपर्क किया। बम देखने के लिए भीड़ को इकट्ठा होने से रोकने के लिए पुलिस और कृषि विश्वविद्यालय के सुरक्षा कर्मियों को घटनास्थल पर तैनात किया गया है।

हो सकती थी जान-माल की भारी हानि

बम निरोधक दल ने बम का माप लिया। यह बम साढ़े चार फीट लंबा, 4 फीट व्यास वाला तथा 453 किलोग्राम वजनी है। बम की पिन बाहर नहीं आई, इसलिए बम नहीं फटा। अन्यथा, एक किलोमीटर के दायरे में स्थित क्षेत्र तबाह हो जाता। भूकंप जैसे झटके 3 से 4 किलोमीटर तक महसूस किए गए। इससे जान-माल की भारी हानि होती। यह जानकारी सैन्य अधिकारियों ने दी।

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