Sagar Railway Employee: सागर जिले से तकनीक और इंसानियत की मिसाल पेश करने वाला एक प्रेरणादायक मामला सामने आया है। नरयावली रेलवे स्टेशन पर तैनात एक रेलवे कर्मचारी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से चार महीने से लापता एक मानसिक रूप से अस्वस्थ युवक को उसके परिवार से मिलवा दिया। पिता-पुत्र के मिलन का भावुक दृश्य देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं।
नरयावली रेलवे स्टेशन पर पदस्थ पाइंट्समैन रामकेश मीणा ने बताया कि 22 जुलाई को ड्यूटी के दौरान उनकी नजर एक सहमे हुए और रोते हुए युवक पर पड़ी। बातचीत करने की कोशिश की गई, लेकिन युवक की भाषा कोई समझ नहीं पाया। वह केवल "अंकल खाना" कह सका। खाना खिलाने के बाद जब उससे कागज पर नाम लिखवाया गया तो लिखावट समझ में नहीं आई।
रामकेश मीणा ने एआई टूल की मदद से लिखावट की पहचान कराई। इससे पता चला कि लिखी गई भाषा उड़िया है और युवक का नाम कृतिक बेग है। इसके बाद चाइल्ड हेल्पलाइन और स्थानीय स्तर पर संपर्क कर ओडिशा के रायगढ़ जिले में रहने वाले उसके परिजनों का पता लगाया गया। आखिरकार युवक के भाई का मोबाइल नंबर मिला और वीडियो कॉल के जरिए उसकी पहचान की पुष्टि हुई।
परिजनों के सागर जिले पहुंचने में समय लगने वाला था। ऐसे में मानसिक रूप से अस्वस्थ युवक की सुरक्षा की जिम्मेदारी रामकेश मीणा ने खुद उठाई। उन्होंने कृतिक को अपने सरकारी आवास पर रखा, चार दिनों तक उसकी देखभाल की और खाने-पीने व कपड़ों की व्यवस्था भी की। ड्यूटी पर जाते समय भी उसे अपने साथ रखते रहे।
परिजन जब सागर पहुंचे तो रेलवे स्टेशन पर पिता और पुत्र का भावुक मिलन हुआ। चार महीने से बिछड़े बेटे को सामने देखकर पिता की आंखों से आंसू छलक पड़े, जबकि कृतिक भी अपने परिजनों से मिलकर भावुक हो गया। यह दृश्य वहां मौजूद लोगों के लिए भी बेहद भावुक करने वाला था।
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रामकेश मीणा की सूझबूझ, संवेदनशीलता और एआई तकनीक के उपयोग ने एक परिवार को फिर से जोड़ दिया। यह घटना बताती है कि यदि तकनीक का सही उपयोग मानवीय संवेदनाओं के साथ किया जाए तो वह कई जिंदगियों में खुशियां लौटा सकती है।