MP के गांधीसागर अभयारण्य में प्रभास-पावक और धीरा-राधा समेत 4 चीते मौजूद
कूनो के बाद गांधीसागर बना चीतों का दूसरा प्रमुख ठिकाना
जंगल सफारी से जेट स्की तक एडवेंचर का रोमांच, गांधीसागर बना MP का एडवेंचर टूरिज्म केंद्र
Gandhi Sagar Becomes Second Home For Cheetahs In MP: मध्य प्रदेश के गांधीसागर वन्यजीव अभयारण्य में अब चीतों का कुनबा बढ़ाने की उम्मीदें मजबूत हो रही हैं। कूनो नेशनल पार्क के बाद गांधीसागर देश में चीतों का दूसरा प्रमुख ठिकाना बनकर उभरा है। यहां चीतों की संख्या बढ़कर चार हो चुकी है।
वन्यजीव विशेषज्ञों और नेचुरलिस्ट के मुताबिक, गांधीसागर का प्राकृतिक परिवेश चीतों के लिए अनुकूल है और आने वाले समय में यहां चीतों की संख्या बढ़ने की संभावनाएं हैं। हालांकि, इनकी संख्या बढ़ना प्रजनन, स्वास्थ्य, भोजन और सुरक्षित आवास जैसे कारकों पर निर्भर करेगा।
गांधीसागर अभयारण्य में फिलहाल दो नर चीते प्रभास और पावक तथा दो मादा चीते धीरा और राधा मौजूद हैं। सितंबर 2026 में बोत्सवाना मूल की मादा चीता राधा को यहां लाया गया था। इसके साथ ही अभयारण्य में चीतों की संख्या चार हो गई। चीतों को अलग-अलग सुरक्षित बाड़ों में रखा गया है। इस व्यवस्था का उद्देश्य उन्हें नए वातावरण के अनुकूल होने का समय देना और भविष्य में प्रजनन की संभावनाओं को मजबूत करना है। अलग-अलग आनुवंशिक पृष्ठभूमि वाले चीतों की मौजूदगी भी इस परियोजना के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
गांधीसागर वन्यजीव अभयारण्य मंदसौर और नीमच जिलों में फैला हुआ है। यहां खुला घास का मैदान, झाड़ीदार वन क्षेत्र, चट्टानी पठार और चंबल नदी का बैकवॉटर इलाके को विशिष्ट प्राकृतिक स्वरूप देते हैं। चीतों के लिए खुले इलाके में दौड़ने, शिकार करने और अपने क्षेत्र में विचरण करने की पर्याप्त जगह अहम होती है। इसके साथ ही शिकार प्रजातियों की उपलब्धता, पानी, सुरक्षित आवास और मानवीय हस्तक्षेप पर नियंत्रण भी जरूरी है। गांधीसागर में इन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रखकर चीतों के दीर्घकालिक संरक्षण की दिशा में काम किया जा रहा है।
गांधीसागर में चीतों के अनुकूल वातावरण और भविष्य की संभावनाओं को लेकर नेचुरलिस्ट का कहना है कि यहां चीतों की संख्या बढ़ने की गुंजाइश है। चार चीतों की मौजूदगी इस दिशा में एक अहम कदम है। हालांकि, चीतों का स्थायी कुनबा विकसित होने में समय लगेगा और इसके लिए सफल प्रजनन के साथ शावकों का सुरक्षित रहना भी जरूरी होगा। चीतों की संख्या बढ़ने की उम्मीद के साथ गांधीसागर वन्यजीव संरक्षण के एक नए केंद्र के रूप में भी अपनी पहचान मजबूत कर रहा है।
गांधीसागर की पहचान अब सिर्फ बांध, जंगल और प्राकृतिक खूबसूरती तक सीमित नहीं है। पिछले तीन साल में यह मध्यप्रदेश में एडवेंचर टूरिज्म के प्रमुख केंद्र के रूप में उभरा है। गांधीसागर फॉरेस्ट रिट्रीट के जरिए पर्यटकों को प्रकृति के बीच ठहरने और रोमांचक गतिविधियों का अनुभव करने का अवसर मिल रहा है। नेचुरलिस्ट के मुताबिक, “गांधीसागर पिछले तीन साल में मध्यप्रदेश के एडवेंचर कैपिटल के रूप में उभरा है। हम कह सकते हैं कि यह केवल एक जगह नहीं, अपने आप में एक अनुभव है। जब कोई व्यक्ति यहां आता है, तो उसे सिर्फ जंगल सफारी के अलावा कई तरह की गतिविधियों और एडवेंचर का हिस्सा बनने का मौका मिलता है।”
गांधीसागर फॉरेस्ट रिट्रीट में पर्यटकों के लिए कई तरह की गतिविधियां उपलब्ध कराई जा रही हैं। इनमें जंगल सफारी के अलावा जेट स्की, स्पीड बोटिंग, कयाकिंग, ड्रैगन बोट, एटीवी राइड और अन्य एडवेंचर गतिविधियां शामिल हैं। पैरासेलिंग और पैरामोटरिंग जैसी गतिविधियां भी उपलब्धता के आधार पर आयोजित की जाती हैं। चंबल के बैकवॉटर में सूर्यास्त का नजारा, प्राकृतिक परिवेश में टेंट स्टे और आसपास के ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण इस अनुभव को और खास बनाते हैं। चतुर्भुजनाथ नाला के प्राचीन शैलचित्र और क्षेत्र के ऐतिहासिक किले भी यहां आने वाले पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं।
गांधीसागर में वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन को साथ लेकर आगे बढ़ने की कोशिश की जा रही है। चीतों की मौजूदगी से वन्यजीव पर्यटन को नई पहचान मिलने की संभावना है, जबकि फॉरेस्ट रिट्रीट और एडवेंचर गतिविधियां पर्यटकों को यहां अधिक समय बिताने के लिए आकर्षित कर सकती हैं। इससे स्थानीय स्तर पर गाइड, परिवहन, होमस्टे, खानपान और अन्य पर्यटन सेवाओं से जुड़े लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं। हालांकि, पर्यटन का विस्तार वन्यजीवों की सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए करना होगा।