जबलपुर हाईकोर्ट (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया) 
जबलपुर

MPPSC मुख्य परीक्षा-2025 का रास्ता साफ, जबलपुर हाईकोर्ट ने हटाई रोक, हजारों अभ्यर्थियों को राहत

MPPSC High Court Order : मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने MPPSC राज्य सेवा मुख्य परीक्षा-2025 पर लगी रोक हटा दी है। कोर्ट के फैसले के बाद आयोग को परीक्षा आयोजित करने की अनुमति मिल गई है।

प्रीतेश जैन

MPPSC State Service Main Exam 2025: मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) की राज्य सेवा मुख्य परीक्षा-2025 पर लगी रोक गुरुवार को हट गई। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने अंतरिम स्थगन आदेश समाप्त करते हुए आयोग को मुख्य परीक्षा आयोजित करने की अनुमति दे दी है। इस फैसले से लंबे समय से परीक्षा का इंतजार कर रहे हजारों अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है।

मामले की सुनवाई हाईकोर्ट की युगलपीठ, कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल ने की। अदालत ने स्पष्ट किया कि मुख्य परीक्षा आयोजित करने का रास्ता खोल दिया गया है, हालांकि भर्ती प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण कानूनी और संवैधानिक मुद्दों पर अंतिम निर्णय अभी शेष है। मामले की अगली सुनवाई 17 जुलाई 2026 को निर्धारित की गई है।

चयन प्रक्रिया को लेकर हाईकोर्ट पहुंचे थे अभ्यर्थी

दरअसल, मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग की राज्य सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2025 की चयन प्रक्रिया को लेकर कई अभ्यर्थियों ने जबलपुर हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की थीं। याचिकाओं में आरोप लगाया गया था कि आयोग ने विभिन्न वर्गों के कटऑफ अंक सार्वजनिक नहीं किए और आरक्षित वर्ग के मेधावी अभ्यर्थियों को ओपन मेरिट सीटों पर समायोजित करने के सिद्धांत का सही तरीके से पालन नहीं किया।

25 मार्च 2025 को हटा दी थी अंतरिम रोक

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने अदालत से आग्रह किया कि मुख्य परीक्षा पर लगी रोक हटाई जाए, ताकि हजारों उम्मीदवारों का भविष्य प्रभावित न हो। साथ ही, कानूनी और संवैधानिक मुद्दों पर अलग से सुनवाई जारी रखी जाए। इस तर्क को स्वीकार करते हुए अदालत ने 25 मार्च 2025 को जारी अंतरिम रोक को समाप्त कर दिया।

अनारक्षित श्रेणी में समायोजन पर भी विवाद

मामले में एक बड़ा विवाद आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के अनारक्षित श्रेणी में समायोजन को लेकर भी है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि जो उम्मीदवार सामान्य वर्ग के कटऑफ से अधिक अंक प्राप्त करते हैं, उन्हें ओपन मेरिट सीटों पर चयनित किया जाना चाहिए। इसके अलावा आयु सीमा में छूट पाने वाले अभ्यर्थियों के माइग्रेशन नियमों की संवैधानिक वैधता को भी चुनौती दी गई है। कटऑफ अंक सार्वजनिक नहीं किए जाने का मुद्दा भी अदालत में प्रमुखता से उठा। सुनवाई के दौरान जबलपुर हाईकोर्ट ने आयोग द्वारा सीलबंद लिफाफे में प्रस्तुत कटऑफ विवरण को खोलकर याचिकाकर्ताओं को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे।

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