सीएम मोहन यादव (सोर्स- सोशल मीडिया)
जबलपुर

सावन के दूसरे सोमवार को जबलपुर में आस्था का सैलाब; CM मोहन यादव ने भी कांवड़ लेकर की यात्रा

CM Mohan Yadav In Jabalpur: जबलपुर में आस्था और पर्यावरण संरक्षण का अनूठा संगम, सावन के दूसरे सोमवार को निकली कांवड़ यात्रा में उमड़े 1 लाख से अधिक श्रद्धालु, CM मोहन यादव ने भी उठाई कांवड़।

पवन पटेल, सजल रघुवंशी

Sawan Somwar Kanwar Yatra Jabalpur: सावन माह देवों के देव महादेव की भक्ति का माह होता है, इस महापर्व पर सावन के दूसरे सोमवार को संस्कारधानी जबलपुर भी भगवान महादेव की भक्ति में पूरी तरह सराबोर नजर आई। शहर में निकली ऐतिहासिक और भव्य संस्कार कांवड़ यात्रा में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। इस अवसर पर एक लाख से ज्यादा कांवड़िये इस भव्य यात्रा में शामिल हुए।

संस्कार कांवड़ यात्रा का यह नौवां वर्ष है। इस यात्रा की खासियत सिर्फ भगवान शिव के प्रति आस्था नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी है। कांवड़िये अपनी कांवड़ के एक पलड़े में मां नर्मदा का पवित्र जल और दूसरे पलड़े में पौधा लेकर यात्रा करते हैं। यानी भक्ति के साथ प्रकृति संरक्षण का संदेश भी लोगों तक पहुंचाया जाता है।

गौरीघाट से कैलाशधाम तक पैदल यात्रा करते हैं कांवड़िए

करीब 22 किलोमीटर लंबी यह यात्रा गौरीघाट से शुरू होकर कैलाश धाम तक पहुंचती है। यात्रा के दौरान हर-हर महादेव और बोल बम के जयघोष से पूरा शहर शिवमय नजर आया। यात्रा में श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ के गानों के रूप में अलग अलग भेष धारण करके शामिल हुए जो नाचते गाते हुए चल रहे थे। कांवड़िये नर्मदा जल लेकर कैलाश धाम पहुंचते हैं और भगवान महादेव का जलाभिषेक करते हैं।

मुख्यमंत्री ने भी कांवड़ लेकर की यात्रा

इस ऐतिहासिक यात्रा में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने भी कांवड़ उठाकर श्रद्धालुओं के साथ यात्रा की। उन्होंने रांझी के गोकलपुर से कैलाश धाम तक कांवड़ यात्रा में हिस्सा लिया। इस दौरान उनके साथ पंचायत एवं ग्रामीण मंत्री प्रहलाद पटेल, विधायक अभिलाष पांडे सहित तमाम जनप्रतिनिधि भी यात्रा में शामिल हुए।

पुष्पवर्षा और ढोल नगाड़ों के साथ हुआ स्वागत

संस्कार कांवड़ यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं के लिए जगह-जगह स्वागत और सेवा के इंतजाम किए गए। यात्रा के पूरे मार्ग में धार्मिक उत्साह और भक्ति का माहौल दिखाई दिया। इस यात्रा को देखने और स्वागत करने यात्रा मार्ग पर जगह जगह मंच बनाए गए जहां से कांवड़ियों पर पुष्पवर्षा की गई और ढोल नगाड़ों के साथ उनका उत्साह बढ़ाया गया।

आस्था, संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण की पहचान बनी यात्रा

संस्कारधानी की संस्कार कांवड़ यात्रा अब सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं रह गई है, बल्कि आस्था, संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण के अनूठे संगम के रूप में अपनी पहचान बना चुकी है। एक तरफ कांवड़ियों के कंधों पर नर्मदा जल था, तो दूसरी तरफ भविष्य को हरा-भरा बनाने का संकल्प। यही संदेश संस्कार कांवड़ यात्रा को खास बनाता है महादेव की भक्ति के साथ प्रकृति की रक्षा। हर-हर महादेव के जयघोष के साथ कैलाश धाम पहुंचे कांवड़ियों ने भगवान शिव का जलाभिषेक किया और पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया।

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