Indore Zoo Celebrates Birth of Two Lion Cubs: इंदौर के कमला नेहरू प्राणी संग्रहालय यानी चिड़ियाघर में एक बार फिर खुशियां आई हैं। यहां शेरनी अर्जुन-सुंदरी के परिवार में दो नन्हे मेहमान आए हैं। सुंदरी ने दो शावकों को जन्म दिया है। दोनों शावक पूरी तरह स्वस्थ बताए जा रहे हैं। इस नए जन्म के साथ इंदौर जू में तेंदुए और टाइगर समेत कुल वन्यजीवों की संख्या में भी इजाफा हुआ है।
कमला नेहरू प्राणी संग्रहालय में लायन अर्जुन-सुंदरी के परिवार में दो नन्हे मेहमान आए हैं। सुंदरी ने दो शावकों को जन्म दिया है। दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं। हालांकि, सुंदरी फिलहाल किसी को अपने पास नहीं जाने दे रही है।
इसके साथ ही आकाश-मेघा के परिवार में सदस्यों की कुल संख्या 14 हो गई है। वहीं, तेंदुआ परिवार के चार और टाइगर फैमिली के 13 सदस्यों को मिलाकर केट परिवार में कुल 31 सदस्य हो गए हैं।
जू प्रशासन अब एनिमल एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत देश के दूसरे चिड़ियाघरों से नए वन्यजीव लाने की तैयारी कर रहा है। टाइगर और लायन फैमिली से पांच से छह सदस्यों को एनिमल एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत दूसरे चिड़ियाघरों में भेजा जाएगा और बदले में वहां से नए जानवर लाए जाएंगे। जू के प्रभारी अधिकारी डॉ. उत्तम यादव के मुताबिक, इसके लिए अलग-अलग राज्यों के कुछ चुनिंदा जू से चर्चा चल रही है। फिलहाल दोनों शावकों पर खास फोकस है, ताकि वे सुरक्षित रहें।
इंदौर जू में तेजी से लायन और टाइगर की संख्या बढ़ रही है। आने वाले समय में इनकी संख्या और बढ़ने की उम्मीद है। प्रशासन एनिमल एक्सचेंज प्रोग्राम के जरिए जू में और भी वन्यजीव लाने की तैयारी कर रहा है।
इंदौर जू में अब चिंपांजी, जिराफ और गेंडा लाने की भी तैयारी है। इसके लिए जू प्रशासन देश के अन्य चिड़ियाघरों से लगातार संपर्क में है। दो जू को प्रस्ताव भी भेजे जा चुके हैं। प्रशासन के मुताबिक, बदले में यहां से लायन-टाइगर और घड़ियाल जैसे जानवर दूसरे चिड़ियाघरों को भेजे जा सकते हैं। हालांकि अभी किसी भी प्रस्ताव पर फाइनल स्वीकृति नहीं मिली है।
इंदौर जू में दर्शकों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। हर रविवार औसतन करीब 20 हजार दर्शक जू पहुंच रहे हैं। मीडिया कैटेगरी के जू में शामिल इंदौर के चिड़ियाघर को भी अच्छी स्थिति में माना जाने लगा है। जू प्रभारी नंदकिशोर पहाड़िया के अनुसार, जू की 14-डी थिएटर सेवा शुरू हो चुकी है और वॉचटावर का काम भी पूरा हो गया है। आने वाले समय में नए वन्यजीव लाए जाएंगे और उनके लिए जरूरत के अनुसार पिंजरे विकसित किए जाएंगे।