इंदौर का बिजासन माता का मंदिर फोटो सोर्स - नवभारत
इंदौर

नवरात्रि स्पेशल: इंदौर की आराध्य देवी बिजासन माता, जहां आस्था से जुड़ी हैं पीढ़ियों की परंपराएं

Navaratri Special Bijasan Mata Temple : इंदौर के बिजासन माता मंदिर का अपना ऐतिहासिक महत्व है। इंदौर ही नहीं पुरे प्रदेश से लोग यहाँ पर दर्शन करने के लिए पहुंचते है।

अंशुल मुकाती, शाजेब खान

Highlights :

  • इंदौर के बिजासन माता मंदिर का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व, नवरात्रि में उमड़ते हैं लाखों श्रद्धालु।

  • मान्यता है कि मंदिर में मां दुर्गा के नौ स्वरूप पिंडी रूप में विराजमान हैं।

  • मंदिर का निर्माण वर्ष 1760 में मराठा शासक शिवाजी राव होलकर ने करवाया था।

  • बिजासन माता को इंदौर की देवी के रूप में भी पूजा जाता है।

  • शादी के बाद नवविवाहित जोड़े माता का आशीर्वाद लेने के लिए पहुंचते हैं।

  • मंदिर को संतान सुख की कामना और मनोकामना पूर्ति की आस्था से जोड़कर देखा जाता है।

Nine Forms of Durga in Indore: इंदौर का बिजासन माता मंदिर अपनी आस्था का एक विशेष महत्व रखता है, इस मंदिर का निर्माण वर्ष 1760 में मराठा शैली में महाराज शिवाजी राव होलकर के द्वारा कराया गया था ।

ये मंदिर दुनिया के उन चुनिंदा मंदिरों में से है जहां पर मां दुर्गा के नौ स्वरूप एक साथ पिंडी रूप में बहन के रूप में विराजमान है, माना जाता है कि यहां पर मौजूद मूर्ति के सभी स्वरूप स्वयंभू है। नवरात्रि के दौरान यहां बड़ा मेला लगता है और लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं।

विश्वास मन्नत और पारिवारिक परंपराओं से जुड़ा है मंदिर

इंदौर शहर के पश्चिमी हिस्से में एयरपोर्ट के नजदीक पहाड़ी पर स्थिति बिजासन माता मंदिर सिर्फ पूजा अर्चना का स्थान नहीं है। ये स्थान विश्वास मन्नत और पारिवारिक परंपराओं से जुड़ा हुआ एक विशेष धाम माना जाता है।

शादी के बाद नवयुगल करते हैं दर्शन

बिजासन माता मंदिर को पुत्रदायनी भी माना जाता है। इसलिए शादी के बाद नवयुगल माता के दर्शन और पूजन के लिए यहां पर आते हैं। इस मंदिर को बिजासन टेकरी के नाम से भी जाना जाता है। नवरात्रि त्योहार के दौरान यहां बड़ा मेला लगता है और लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं।

1760 में शिवाजी राव होलकर ने करवाया था मंदिर का निर्माण

पहले ये मंदिर माता के चबूतरे पर स्थित था, जिसके बाद शिवाजी राव होल्कर ने 1760 में इस मंदिर का निर्माण कराया। बिजासन माता मंदिर को इंदौर की देवी भी माना जाता है। मंदिर की पहाड़ी से पूरे शहर का दृश्य देखने को मिलता है। मंदिर पर माता को चुनरी चढ़ाने का अत्यधिक महत्व है।

नवरात्रि के दिनों में विशेष होता है पूजा का महत्व

धार्मिक परंपरा के अनुसार, मां शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री के स्वरूपों की आराधना की जाती है। नवरात्र के दिनों में मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और श्रृंगार के साथ भक्तों की आवाजाही बढ़ जाती है।

पूरी होती है संतान सुख की कामना

इस मंदिर से संतान सुख की कामना और मनोकामना पूरी होने की आस्था जुड़ी हुई है। यही वजह है कि यहां नवविवाहित जोड़े, परिवार और दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु माता के दर्शन कर आशीर्वाद मांगते हैं।

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