कांग्रेस चलाएगी जिला स्तर पर ‘घर वापसी’ अभियान।
जीतू पटवारी का दावा, 200 से ज्यादा पूर्व विधायक-सांसद लौटना चाहते हैं।
सुरेश पचौरी, संजय शुक्ला और विशाल पटेल छोड़ चुके हैं कांग्रेस।
सिंधिया की बगावत से गिरी थी कमलनाथ सरकार।
MP Congress Launch Ghar Wapsi Campaign: मध्य प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस अब पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए नेताओं की वापसी के लिए ‘घर वापसी’ अभियान चलाने की तैयारी में है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस संबंध में बड़ा बयान देते हुए कहा है कि अभियान जिला स्तर पर चलाया जाएगा। इसके लिए जिला कांग्रेस कमेटियों की सहमति ली जाएगी। पटवारी के मुताबिक, 200 से ज्यादा पूर्व विधायक और सांसद कांग्रेस में वापस आना चाहते हैं। हालांकि, इन नेताओं के नाम और उनकी वापसी को लेकर अभी आधिकारिक सूची सामने आना बाकी है।
कांग्रेस का यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है, जब पिछले कुछ वर्षों में मध्य प्रदेश में पार्टी के कई बड़े चेहरे भाजपा में शामिल हुए हैं। इनमें पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी, पूर्व सांसद गजेंद्र सिंह राजूखेड़ी, पूर्व विधायक संजय शुक्ला और विशाल पटेल जैसे नेता शामिल हैं। वहीं, ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ कांग्रेस छोड़ने वाले विधायकों के राजनीतिक घटनाक्रम ने भी प्रदेश की राजनीति को प्रभावित किया था।
जीतू पटवारी के बयान के मुताबिक, कांग्रेस इस अभियान को जिला स्तर पर आगे बढ़ाएगी। इसके लिए संबंधित जिला कांग्रेस कमेटियों की सहमति ली जाएगी। यानी पार्टी में वापसी की इच्छा जताने वाले नेताओं के मामले में स्थानीय संगठन की भूमिका अहम हो सकती है। पटवारी ने दावा किया है कि 200 से ज्यादा पूर्व विधायक और सांसद कांग्रेस में लौटना चाहते हैं। हालांकि, यह स्पष्ट होना बाकी है कि इस दावे में किन नेताओं के नाम शामिल हैं और वापसी के लिए पार्टी क्या शर्तें तय करेगी। अभियान की औपचारिक रूपरेखा और समयसीमा भी सामने आना बाकी है।
मध्य प्रदेश में कांग्रेस को पिछले कुछ वर्षों में कई प्रभावशाली नेताओं के पार्टी छोड़ने का सामना करना पड़ा है। मार्च 2024 में पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता सुरेश पचौरी भाजपा में शामिल हुए थे। उनके साथ पूर्व सांसद गजेंद्र सिंह राजूखेड़ी ने भी भाजपा का दामन थामा था।इंदौर की राजनीति में प्रभाव रखने वाले पूर्व विधायक संजय शुक्ला और देपालपुर के पूर्व विधायक विशाल पटेल भी मार्च 2024 में भाजपा में शामिल हुए। इन नेताओं की अपने-अपने क्षेत्रों में राजनीतिक पहचान रही है और इनके दल बदलने को मध्य प्रदेश कांग्रेस के लिए अहम घटनाक्रम माना गया।
मध्य प्रदेश में कांग्रेस के लिए सबसे बड़ा राजनीतिक झटका मार्च 2020 में लगा था, जब ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया। उनके साथ 22 कांग्रेस विधायकों ने भी पार्टी छोड़ दी थी। इस घटनाक्रम के बाद कमलनाथ के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार गिर गई और भाजपा की सरकार सत्ता में लौटी। सिंधिया के साथ कांग्रेस छोड़ने वाले नेताओं में इमरती देवी, तुलसी सिलावट जैसे नाम शामिल थे। इनमें से कई नेताओं ने बाद में भाजपा सरकार और प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं। गुना क्षेत्र के प्रभावशाली नेता महेंद्र सिंह सिसोदिया भी सिंधिया के समर्थक माने जाते हैं और कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे।
घर वापसी अभियान की घोषणा और 200 से ज्यादा पूर्व विधायकों-सांसदों के लौटने के दावे के बाद अब निगाहें कांग्रेस की अगली रणनीति पर हैं। यदि पार्टी छोड़ चुके कुछ प्रभावशाली नेता वापस आते हैं, तो इससे स्थानीय स्तर पर संगठन को मजबूती मिल सकती है। हालांकि, इसका असर इस बात पर निर्भर करेगा कि कौन-कौन से नेता वापसी करते हैं और उन्हें संगठन में क्या जिम्मेदारी दी जाती है।
फिलहाल जीतू पटवारी के बयान से अभियान की मंशा सामने आई है, लेकिन संभावित नेताओं के नाम, वापसी की शर्तें और अभियान शुरू होने की तारीख स्पष्ट नहीं हैं। ऐसे में जिला कांग्रेस कमेटियों की सहमति और पार्टी के आधिकारिक फैसलों के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि ‘घर वापसी’ अभियान मध्य प्रदेश कांग्रेस की राजनीति में कितना बड़ा बदलाव लाता है।