तिलक के साथ अक्षत लगाने के नियम (सौ.सोशल मीडिया) 
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तिलक के साथ अक्षत लगाने का भाग्योदय से संबंध जानिए, 'अक्षत' का अर्थ है बड़ा गूढ़

सनातन धर्म में सदियों पुरानी परंपरा रही है कि, तिलक के साथ अक्षत लगाये जाते है। कहा जाता है कि, जिस तरह चावल कभी ख़राब नहीं होते हैं, वैसे ही व्यक्ति की उम्र भी इसे लगाने से कम नहीं होती।

दीपिका पाल

हिंदू धर्म में ऐसी ऐसी प्रथाएं हैं जो सदियों से हमारे बीच चली आ रही हैं और लोग उनका श्रद्धा से पालन करते हैं। अक्सर आपने शादी या किसी त्योहार पर देखा होगा कि लोग तिलक में चावल का प्रयोग करते हैं। पूजन के समय माथे पर कुमकुम के तिलक लगाते समय चावल के दाने भी ललाट पर लगाए जाते हैं।

लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि तिलक के साथ अक्षत लगाने के पीछे का उद्देश्य क्या है। आइए जानें तिलक के साथ अक्षत लगाने के पीछे का उद्देश्य क्या है।

यह होता है तिलक के साथ अक्षत लगाने का महत्व

1- ज्योतिषयों के अनुसार, सनातन धर्म में चावल को संपन्नता का प्रतीक माना गया है। यही कारण है कि, इसे माथे पर तिलक के साथ लगाने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ता है। अक्षत का अर्थ ही है- 'जिसका कभी क्षय न हो।' इसलिए इसका संबंध धन से माना गया है, जो इसे माथे पर लगता है उसे धन की कमी नहीं रहती है।

2- वैज्ञानिक दृष्टिकोण से तिलक लगाने से दिमाग में शांति एवं शीतलता बनी रहती है। यहां चावल लगाने का कारण यह है कि चावल को शुद्धता का प्रतीक माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, चावल को हविष्य यानी हवन में देवताओं को चढ़ाया जाने वाला शुद्ध अन्न माना जाता है।

3- सनातन धर्म में चावल को शुद्धता का प्रतीक माना गया है। भगवान की पूजा-पाठ अथवा मांगलिक कार्यों में तिलक के बाद अक्षत लगाने का रिवाज रहा है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक ऐसा करने से व्यक्ति के आसपास की नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

4- कहा जाता है कि तिलक पर चावल लगाने से सूर्य की ऊर्जा केंद्रित होती है, जिससे पूरे शरीर में आत्मविश्वास का संचार होने लगता है।

5- हम जब भी किसी पूजा-पाठ में सम्मिलित होते हैं या फिर किसी शुभ काम के लिए घर से बाहर निकलते हैं माथे पर तिलक लगाया जाता है। यह तिलक उस आशीर्वाद का प्रतीक होता है जो हमें घर के बड़ों से या फिर पूजा के समय पंडित या पुरोहित से मिलता है।

6- तिलक हमेशा माथे के बीचो-बीच लगाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि तिलक आपके पूरे शरीर के सातों ऊर्जा केंद्रों को नियंत्रित करने में मदद करता है। माथे के बीच में गुरु का स्थान भी होता है, इसलिए माथे पर तिलक लगाने से गुरु को मजबूत किया जा सकता है।

7- सनातन धर्म में सदियों पुरानी परंपरा रही है कि, तिलक के साथ अक्षत लगाये जाते है। कहा जाता है कि, जिस तरह चावल कभी ख़राब नहीं होते हैं, वैसे ही व्यक्ति की उम्र भी इसे लगाने से कम नहीं होती। कहा जाता है कि चावल जितना पुराना होगा, वह उतना ही बेहतर लंबी आयु का करक माना जाता है।

लेखिका- सीमा कुमारी

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