कालकाजी मंदिर दिल्ली (सौ. सोशल मीडिया) 
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दिल्ली का मशहूर कालकाजी मंदिर घूमने से पहले जान लें यहां का इतिहास, जानें क्या थी मराठाओं की भूमिका

राजधानी दिल्ली का प्रसिद्ध और खूबसूरत कालकाजी मंदिर देश के प्रसिद्ध मंदिरों की लिस्ट में शामिल है। इस मंदिर में रोजाना भक्तों की लंबी कतार देखने को मिलती है। यह दिल्ली के कालकाजी इलाके में स्थित है।

प्रीति शर्मा

Kalkaji Mandir Delhi: राजधानी दिल्ली का प्रसिद्ध और खूबसूरत कालकाजी मंदिर देश के प्रसिद्ध मंदिरों की लिस्ट में शामिल है। इस मंदिर में रोजाना भक्तों की लंबी कतार देखने को मिलती है। यह दिल्ली के कालकाजी इलाके में स्थित है। माना जाता है कि इस मंदिर में देवी कालका से जो भी भक्त सच्चे मन से मांगते हैं उनकी सभी मुरादें पूरी हो जाती हैं। यह मंदिर कालका देवी दुर्गा के अवतारों में से एक को समर्पित है। यह प्राचीन मंदिर सिद्धपीठों में से एक जहां पर नवरात्रि के समय काफी भीड़ होती है।

महाभारत काल से भी है मंदिर का संबंध

इस मंदिर का निर्माण यहां पर रहने वाले ब्राह्मणों और बाबाओं की भूमि पर किया गया है। वही इस मंदिर के पुजारी बने और पूजा पाठ का कार्य संभालते हैं। वर्तमान समय की बात की जाए तो यह दिल्ली के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। इस मंदिर का इतिहास महाभारत काल से भी जुड़ है। जिसकी वजह से इसका महत्व बढ़ जाता है। मान्यताओं के अनुसार महाभारत काल में युद्ध से पहले भगवान श्री कृष्ण ने पांडवों के साथ यहां पर भगवती की आराधना की थी। जिसके बाद बाबा बालकनाथ ने इस पर्वत पर तपस्या की और उन्हें माता भगवती के दर्शन हुए।

मराठाओं ने किया मंदिर का निर्माण

कालकाजी मंदिर भारत के प्राचीन हिंदू मंदिरों में से एक है। माना जाता है कि इस मंदिर का प्राचीन हिस्सा मराठाओं की ओर से सन 1764 ईस्वी में बनवाया गया था। जिसके बाद 1816 ईस्वी में अकबर के पेशकार राजा केदार नाथ ने इस मंदिर का पुनर्निर्माण किया था। कहा जाता है कि करीब बीसवीं शताब्दी में दिल्ली में रहने वाले व्यापारियों और हिंदू धर्म के अनुयायियों ने मंदिर के चारों और धर्मशालाओं और अन्य मंदिरों का निर्माण करवाया। बता दें कि इस दौरान मंदिर का वर्तमान स्वरूप बनाया गया था.

मंदिर में रहने वाले महंत के अनुसार असुरों के द्वारा सताए जाने पर देवताओं ने इसी जगह पर शिव की आराधना की थी। देवताओं के वरदान मांगने पर मां पार्वती ने कौशिकी देवी को प्रकट किया। जिन्होंने कई असुरों का संहार किया। लेकिन कहा जाता है कि वह रक्तबीज को नहीं मार सकीं। जिसके बाद पार्वती ने भुकुटी से महाकाली को प्रकट किया और रक्तबीज का संहार किया। देवताओं ने काली की स्तुति की तो माता भगवती ने कहा कि जो भी इस स्थान पर भक्ति भाव से पूजा करेगा उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होंगी।

कालकाजी मंदिर को विशेष रूप से ईंट और संगमरमर के पत्थरों से बनाया गया है। यह मंदिर पिरामिडनुमा आकार का बना हुआ है। मंदिर का सेंट्रल चैंबर पूरी तरह से संगमरमर का बना हुआ है। इसके बरामदे की बात करें तो यह 8 से 9 फुट तक चौड़ा है। वहीं मुख्य मंदिर के गर्भगृह में माता का शक्तिपीठ विराजमान है। मंदिर के सामने आंगन में दो बाघ की मूर्ति भी दिखाई देगी। इसका निर्माण बलुआ पत्थरों से किया गया है। इस मंदिर की सुंदर वास्तुकला आपको मोहित कर देगी।

कालकाजी मंदिर के मुख्य 12 द्वार हैं जो 12 महीनों के संकेत देते हैं। वहीं हर एक द्वार के पास माता के अलग-अलग रूपों की चित्रण है। दुनिया भर के मंदिर को ग्रहण के वक्त बंद कर दिया जाता है लेकिन कालकाजी मंदिर इस दौरान खुला रहता है। इस मंदिर में रोजाना वेदोक्त, पुराणोक्त और तंत्रोक्त विधियों से पूजा की जाती है। नवरात्रि के दौरान इस मंदिर परिसर में मेला का आयोजन किया जाता है। कालकाजी मंदिर सुबह 10 बजे से लेकर रात 11 बजे तक खुला रहता है। किसी भी समय मंदिर में पूजा या दर्शन के लिए आ सकते हैं। यहां सुबह शाम दो बार आरती की जाती है।

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