विश्व रेडियोग्राफी दिवस (सौ.सोशल मीडिया) 
हेल्थ

अदृश्य चीजों को देखना भी आसान बनाती हैं रेडियोग्राफी तकनीक, जानिए इसका इतिहास और महत्व

आजकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज के दौरान रेडियोग्राफी थेरेपी का उपयोग किया जाता है। इस तकनीक के विषय में हर किसी को जानकारी नहीं होती है इसके लिए वैश्विक स्तर पर एक प्रकार का हेल्थ केयर अवेयरनेस दिवस का इवेंट बनाया जाता है।

दीपिका पाल

World Radiography Day 2024: दुनियाभर में कई बड़ी बीमारियों के खतरे बढ़ते जा रहे है इससे निपटने के लिए वैज्ञानिक कई तकनीकें भी ईजाद कर रहे है। इसके चलते ही रेडियोग्राफी को बढ़ावा देते हुए विश्व रेडियोग्राफी दिवस को हर साल 8 नवंबर को मनाया जाता है। आजकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज के दौरान रेडियोग्राफी थेरेपी का उपयोग किया जाता है। इस तकनीक के विषय में हर किसी को जानकारी नहीं होती है इसके लिए वैश्विक स्तर पर एक प्रकार का हेल्थ केयर अवेयरनेस दिवस का इवेंट बनाया जाता है।

कब हुई इस दिवस को मनाने की शुरुआत

यहां पर विश्व रेडियोग्राफी दिवस के इतिहास को लेकर चलें को, 17 साल पहले 2007 में दुनियाभर में रेडियोग्राफी दिवस मनाने को लेकर पहल की गई। यहां पर सबसे पहले यह दिन इंटरनेशनल सोसायटी ऑफ रेडियोग्राफर्स ने मनाया था। उसके बाद 2012 में इसे दिवस को लेकर अब तक का सबसे बड़ा इवेंट किया गया। जिसे यूरोपियन सोसाइटी ऑफ रेडियोलॉजी द्वारा ऑर्गेनाइज किया गया था। इस प्रकार से हर साल 8 नवंबर के दिन रेडियोग्राफी के लिए यह दिन आयोजित किया जाता है।

जानें क्या है इस दिवस की थीम

विश्व रेडियोग्राफी दिवस की बात की जाए तो, इस दिवस को हर साल रेडियोग्राफी तकनीक बढ़ावा देने के लिए मनाया जाता है। इस दिवस को लेकर हर साल थीम बदलती रहती है। इस साल इसकी थीम की बात करें तो, रेडियोग्राफी: सींग द अनसीन है। इसका मतलब होता है की रेडियोग्राफी जैसी तकनीक के माध्यम से हम बिना दिखने वाली चीजों को भी देख सकते हैं।

क्यों मनाते हैं ये दिन

यहां पर रेडियोग्राफी की बात की जाए तो, हर साल विश्व रेडियोग्राफी दिवस मनाया जाता है। यह दिन लोगों तक रेडियोग्राफी से जुड़ी जागरूकता फैलाने के लिए मनाया जाता है ताकि पिछड़े हुए इलाकों के लोगों को या जिन्हें इस बारे में जानकारी नहीं है उन तक जरूरी जानकारी फैलाई जा सके। इसके अलावा रेडियोग्राफी की उपयोगिता को बढ़ाने के लिए यह दिन मनाया जाता है। उन तक यह बताया जा सके की अब किसी भी बीमारी की पहचान उनके शुरुआती चरण में की जा सकती है और बीमारी को बढ़ने से रोका जा सकता है।

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