मेनोपॉज में हार्मोनल बदलावों से शरीर और मन पर असर पड़ता है।
नींद की कमी, चिड़चिड़ापन और जोड़ों का दर्द भी हो सकते हैं लक्षण।
हर महिला का अनुभव अलग होता है, इसलिए उनकी परेशानी को नजरअंदाज न करें।
पुरुष घरेलू जिम्मेदारियां बांटकर और उनकी बात सुनकर सहयोग करते हैं।
How to Support Women During Menopause: घर में जब पत्नी, मां या बहन चिड़चिड़ी रहने लगे, रात में ठीक से सो न पाए या बार-बार थकान और शरीर में दर्द की शिकायत करें, तो परिवार के लोग कई बार इसे उम्र का असर या स्वभाव में बदलाव समझ लेते हैं। लेकिन 40-50 की उम्र के आसपास महिलाओं में होने वाले इन बदलावों के पीछे पेरिमेनोपॉज या मेनोपॉज वजह हो सकती है।
मेनोपॉज महिलाओं के जीवन का एक चरण है। इस दौरान शरीर में एस्ट्रोजन जैसे हार्मोन का स्तर बदलता है, जिससे कुछ महिलाओं को शारीरिक और मानसिक परेशानियां हो सकती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, ज्यादातर महिलाओं में मेनोपॉज 45 से 55 वर्ष की उम्र के बीच होता है। बता दें कि इसका समय और अनुभव हर महिला के लिए अलग होता है।
18 अक्टूबर को मनाए जाने वाले वर्ल्ड मेनोपॉज डे का मकसद भी इस विषय पर जागरूकता बढ़ाना है। ऐसे में पुरुषों के लिए भी यह समझना जरूरी है कि घर की महिलाएं इस दौर में किन बदलावों से गुजरती हैं और वे किस तरह उनका साथ दे सकते हैं।
मेनोपॉज से पहले के दौर, जिसे पेरिमेनोपॉज कहते हैं, इस दौरान पीरियड्स के समय और रक्तस्राव में बदलाव होता है। कभी पीरियड्स जल्दी आ सकते हैं, तो कभी इनके बीच ज्यादा अंतर होता है। रक्तस्राव पहले से कम या ज्यादा भी हो सकता है।
ऐसे में पीरियड्स में बदलाव के कारण महिला को परेशानी या चिंता होती है। इस विषय पर सवाल पूछते समय संकोच या मजाक करने के बजाय उनकी बात सहजता से सुनें। अगर ब्लीडिंग बहुत ज्यादा हो या सामान्य से अलग लगे, तो डॉक्टर से सलाह लेने में मदद करें।
कुछ महिलाओं को अचानक चेहरे, गर्दन और छाती में तेज गर्मी महसूस होती है। इसे हॉट फ्लैशेज कहा जाता है। रात में पसीना आने के कारण कपड़े या बिस्तर बदलने की जरूरत भी पड़ सकती है।
ऐसे में बार-बार पंखा चलाने, कमरे का तापमान कम करने या रात में उठने की जरूरत को बेवजह की परेशानी न समझें। कमरे को आरामदायक रखने और जरूरत के समय मदद करने से उन्हें राहत मिल सकती है।
मेनोपॉज के दौरान कुछ महिलाओं को सोने में परेशानी होती है या रात में बार-बार नींद खुल जाती है। रात में पसीना आना भी इसकी वजह हो सकता है। नींद पूरी न होने से अगले दिन थकान, चिड़चिड़ापन और काम पर ध्यान लगाने में समस्या होती है।
अगर महिला दिनभर थकी हुई है, तो इसे आलस न समझें। घर के काम बांटें, उन्हें आराम करने का समय दें और सोने के लिए शांत व आरामदायक माहौल बनाएं।
हार्मोनल बदलावों के दौरान कुछ महिलाओं को मूड स्विंग, बेचैनी, उदासी या चिंता महसूस होती है। नींद की कमी भी इन परेशानियों को बढ़ा सकती है। इसका असर उनके रिश्तों और रोजमर्रा के कामों पर भी पड़ सकता है।
हर बार उनकी परेशानी को गुस्सा या नखरा कहकर न टालें। उनकी बात सुनें, बिना जज किए अपनी भावनाएं व्यक्त करने दें और यह न मानें कि हर बदलाव का कारण सिर्फ मेनोपॉज ही है। अगर उदासी या चिंता लगातार बनी रहे, तो डॉक्टरी सलाह लें।
मेनोपॉज के दौरान कुछ महिलाओं को घुटनों, कंधों, कमर या दूसरे जोड़ों में दर्द और अकड़न महसूस हो सकती है। साल 2026 के वर्ल्ड मेनोपॉज डे की थीम भी मिडिल एज में होने वाले लंबे समय के दर्द पर फोकस है।
अगर पत्नी या मां बार-बार शरीर में दर्द की शिकायत करती हैं, तो इसे सिर्फ उम्र बढ़ने का असर मानकर नजरअंदाज न करें। रोजमर्रा के कामों में हाथ बंटाएं। लगातार या तेज दर्द के अन्य कारण भी हो सकते हैं, इसलिए खुद से मेनोपॉज को इसका कारण न मानें।
कुछ महिलाओं को इस दौर में चीजें याद रखने, किसी काम पर ध्यान केंद्रित करने या एक साथ कई काम संभालने में मुश्किल होती है। इसे आम बोलचाल में ब्रेन फॉग कहा जाता है। नींद की कमी और तनाव भी इसका कारण हो सकते हैं।
छोटी-छोटी बातें भूलने पर ताना देने या बार-बार टोकने से बचें। जरूरी कामों की सूची बनाने, अपॉइंटमेंट याद रखने या जिम्मेदारियां बांटने में मदद करें।
मेनोपॉज के दौरान एस्ट्रोजन का स्तर कम होने से कुछ महिलाओं को योनि में सूखापन, खुजली या सेक्स के दौरान दर्द और असहजता महसूस होती है। कुछ महिलाओं की यौन इच्छा में भी बदलाव आता है। इन समस्याओं पर बात करना कई बार उनके लिए मुश्किल हो सकता है।
शारीरिक नजदीकी को लेकर दबाव न बनाएं और उनकी असहजता को किसी और तरीके से न देखें। खुलकर, सम्मान के साथ बातचीत करें।
उनकी बात सुनें: हर परेशानी का तुरंत समाधान देने के बजाय पहले समझने की कोशिश करें कि वे क्या महसूस कर रही हैं।
घर के काम बांटें: खाना बनाने, सफाई, बच्चों की जिम्मेदारियों और दूसरे कामों में बराबर हाथ बंटाएं।
डॉक्टर के पास जाने में सहयोग करें: लक्षण रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर रहे हों, तो अपॉइंटमेंट लेने या साथ जाने की पेशकश करें।
मजाक या तुलना न करें: उनकी परेशानी को बढ़ती उम्र, स्वभाव या गुस्से से जोड़कर न टालें।
अपनी जानकारी बढ़ाएं: मेनोपॉज के बारे में पढ़ें और उनसे पूछें कि उन्हें किस तरह की मदद चाहिए।