सोनम वांगचुक (सोर्स-सोशल मीडिया) 
देश

मैं जीना चाहता हूं...अनशन खत्म नहीं कर सकता, सोनम वांगचुक ने सरकार को लिखी चिट्ठी, छात्रों के लिए की ये मांग

Delhi Student Protest: सोनम वांगचुक ने कहा कि आंदोलन में शामिल छात्रों पर किसी भी तरह की कानूनी या दंडात्मक कार्रवाई न करने का सरकार लिखित आश्वासन दे, तभी वह अपना अनिश्चितकालीन अनशन समाप्त करेंगे।

अर्पित शुक्ला

Sonam Wangchuk Hunger Strike: शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षा पेपर लीक मामलों में जवाबदेही और छात्रों के हितों को लेकर अनिश्चितकालीन अनशन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षाविद् सोनम वांगचुक ने केंद्र सरकार से आंदोलन में शामिल युवाओं के खिलाफ किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का स्पष्ट लिखित आश्वासन मांगा है। उन्होंने कहा कि ऐसा आश्वासन मिलने पर ही वह अनशन समाप्त करने पर विचार करेंगे।

सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक खुला पत्र साझा किया, जिसे उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी. नड्डा और केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह के नाम संबोधित किया गया है। उन्होंने पत्र में बताया कि दोनों मंत्री मंगलवार रात अस्पताल में उनसे मिलने पहुंचे थे और उन्होंने अनशन समाप्त करने का आग्रह किया था।

लेटर में क्या लिखा सोनम ने?

वांगचुक ने लिखा कि मुलाकात के दौरान मंत्रियों ने उन्हें भरोसा दिलाया कि सरकार उनकी प्रमुख मांगों पर सकारात्मक रूप से विचार करेगी। इनमें परीक्षा पेपर लीक की घटनाओं के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को उचित मुआवजा देने और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर संसद में सार्थक चर्चा सुनिश्चित करने जैसी मांगें शामिल हैं।

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि चर्चा के दौरान केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर भी विचार किए जाने की बात सामने आई। अपने पत्र में वांगचुक ने 20 जुलाई को आयोजित 'चलो संसद' मार्च का भी उल्लेख किया।

छात्रों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं की जाए

उन्होंने कहा कि पुलिस की कथित सख्ती और बल प्रयोग के बावजूद यह मार्च पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा। देश और दुनिया ने देखा कि युवाओं ने लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखी और संयम का परिचय दिया। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस आंदोलन में भाग लेने वाले छात्रों और युवाओं के खिलाफ किसी भी प्रकार की प्रतिशोधात्मक या कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी।

वांगचुक ने बताया कि केंद्रीय मंत्रियों की मुलाकात के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों के करीब 65 सांसदों ने उन्हें पत्र लिखकर अनशन समाप्त करने की अपील की है। कुछ सांसद व्यक्तिगत रूप से उनसे मिलने भी पहुंचे हैं, जबकि अन्य के मिलने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि सभी सांसदों ने उन्हें याद दिलाया कि देश और शिक्षा के क्षेत्र में उनका योगदान अभी बाकी है।

अनशन समाप्त नहीं कर सकते

हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि वह केवल व्यक्तिगत आग्रहों के आधार पर अनशन समाप्त नहीं कर सकते। उन्होंने लिखा, "मैं जीना चाहता हूं। मैं अपने छात्रों और शिक्षा के क्षेत्र में लौटना चाहता हूं, लेकिन जिन युवाओं के लिए यह आंदोलन शुरू हुआ, उनके हितों की अनदेखी करके ऐसा नहीं कर सकता।"

सोनम वांगचुक ने सरकार से आग्रह किया कि आंदोलन में शामिल किसी भी युवा प्रदर्शनकारी के खिलाफ कोई दंडात्मक या बदले की भावना से कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी, इसका स्पष्ट आश्वासन दिया जाए। इन युवाओं का एकमात्र उद्देश्य एक निष्पक्ष, पारदर्शी और जवाबदेह शिक्षा व्यवस्था की मांग करना है।

पुलिस की ओर से आगे बल प्रयोग ना हो

उन्होंने कहा कि यदि सरकार यह भरोसा देती है तो वह विश्वास के साथ अपना अनशन समाप्त कर देंगे। लेकिन यदि ऐसा आश्वासन नहीं मिलता है तो उन्हें अनिश्चितकालीन अनशन जारी रखने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। उन्होंने यह भी अपील की कि आंदोलन को नियंत्रित करने के लिए पुलिस की ओर से आगे किसी प्रकार के बल प्रयोग से बचा जाए।

अपने पत्र के अंत में वांगचुक ने कहा कि किसी लोकतंत्र की वास्तविक मजबूती इस बात से तय होती है कि वह अपने असहमत नागरिकों, विशेषकर युवाओं, के साथ कैसा व्यवहार करता है। युवा जब साहस, उम्मीद और लोकतांत्रिक भावना के साथ अपनी आवाज उठाते हैं, तो उनकी बात सुनना लोकतांत्रिक व्यवस्था की जिम्मेदारी है।

-एजेंसी इनपुट के साथ

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