मेरठ: केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मेरठ में किसानों से रूबरू होते हुए अपनी भावनाएं कुछ ऐसे शब्दों में जाहिर कीं जो सीधे दिल को छू गईं। उन्होंने कहा कि अब वे सिर्फ दिल्ली में बैठने वाले मंत्री नहीं, बल्कि हर सांस में खेती का अहसास लेकर काम कर रहे हैं। अपने पुराने अनुभवों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जब वे किसी राज्य की जिम्मेदारी संभाल रहे थे, तो वह सीमित थी, लेकिन अब वे पूरे देश के किसानों के साथ हैं और इसलिए खुद खेतों में पहुंचकर संवाद कर रहे हैं।
शिवराज सिंह चौहान ने यह भी कहा कि वे किसी प्रचार के लिए नहीं, बल्कि किसानों के बीच रहकर उनकी जरूरतों को समझने आए हैं। उन्होंने खेती और ग्रामीण विकास को अपनी पहली प्राथमिकता बताते हुए भरोसा दिलाया कि किसानों के हितों को लेकर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। इस मौके पर उनके साथ मौजूद भाजपा सांसद ने भी इस पहल की सराहना की और इसे किसानों से सरकार के सीधे संवाद का मजबूत जरिया बताया।
किसानों से जुड़ाव की नई परिभाषा कृषि मंत्री ने कहा कि अब वे मंत्रालय की चारदीवारी से बाहर निकलकर धरातल पर आकर काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनका काम सिर्फ नीतियां बनाना नहीं, बल्कि उन नीतियों का असर खुद किसानों से सुनकर समझना है। उन्होंने कहा कि गांव, किसान और खेती से ही देश की मजबूती तय होती है और वे इसे अपनी आत्मा से जोड़कर देख रहे हैं।
दिल्ली से नहीं, खेतों से चल रही है बात
उन्होंने स्पष्ट किया कि अब कृषि मंत्रालय की दिशा सिर्फ कागज़ों पर नहीं चलती, बल्कि खेतों की धूल से जुड़कर आगे बढ़ रही है। उनका मानना है कि किसानों की समस्याओं का हल तभी संभव है जब संवाद सीधे हो और समाधान धरातल पर उतरे। उन्होंने कहा कि वे लगातार गांव-गांव जाकर खुद किसानों से मिलेंगे और उनके सुझावों के आधार पर ही भविष्य की योजनाएं बनेंगी।