RSS प्रमुख मोहन भागवत (सोर्स: सोशल मीडिया) 
देश

ये सरकार की जिम्मेदारी…अवैध बांग्लादेशियों-रोहिंग्या पर संघ प्रमुख भागवत का बड़ा बयान, जानें क्या कहा

Mohan Bhagwat in Hyderabad: RSS प्रमुख का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों में देश अपने हितों से चलते हैं, भारत को भी बिना किसी समझौते के अपना रास्ता खुद तय करना चाहिए।

अर्पित शुक्ला

Mohan Bhagwat News: भारत में बड़ी संख्या में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों को लेकर समय-समय पर उन्हें देश से बाहर करने की मांग उठती रही है। इस गंभीर मुद्दे पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि अवैध तरीके से घुसे बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं की पहचान करना और उन्हें देश से बाहर निकालना सरकार की जिम्मेदारी है।

संघ प्रमुख ने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों में हर देश अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देता है और भारत को भी बिना किसी दबाव या समझौते के अपने हितों के अनुसार निर्णय लेने चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि तेजी से बदलते वैश्विक हालात से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए देश का आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत होना बेहद जरूरी है।

संघ के 100 साल पूरे होने पर कार्यक्रम

आरएसएस की ओर से जारी बयान के अनुसार, मोहन भागवत ने रविवार को हैदराबाद में ‘संघ यात्रा के 100 साल – नए क्षितिज’ विषय पर आयोजित एक कार्यक्रम में अपने विचार रखे। इस कार्यक्रम में कई विशिष्ट अतिथि भी मौजूद थे। हैदराबाद दौरे के दौरान उन्होंने संघ की शताब्दी के अवसर पर फिल्म जगत की हस्तियों और वरिष्ठ नौकरशाहों से भी मुलाकात की।

अवैध घुसपैठ पर क्या बोले भागवत?

अवैध प्रवासियों से जुड़े सवाल पर मोहन भागवत ने कहा कि उनकी पहचान करना और उन्हें देश से बाहर भेजना सरकार का काम है, जबकि आम नागरिक इस तरह के मामलों की जानकारी संबंधित अधिकारियों को दे सकते हैं।

वैश्विक उथल-पुथल का भारत पर सीमित असर

भागवत ने कहा कि दुनिया में चल रही लगातार “उथल-पुथल” का असर भारत पर अपेक्षाकृत कम पड़ेगा। इसकी वजह बताते हुए उन्होंने कहा कि भारत में मजबूत पारिवारिक व्यवस्था, सोने जैसी बचत की परंपरा और परिवार-केंद्रित आर्थिक गतिविधियां देश को स्थिरता प्रदान करती हैं।

संघ को समझने पर जोर

संघ को लेकर मोहन भागवत ने कहा कि आरएसएस को सही मायनों में समझने के लिए उसका हिस्सा बनना जरूरी है, तभी वास्तविक अनुभव हो सकता है। उन्होंने कहा कि यदि कोई संघ को केवल सतही रूप से देखेगा, तो वह उसे गलत भी समझ सकता है। संघ हमेशा इस बात पर बल देता रहा है कि देश के विकास में नागरिकों की भूमिका बेहद अहम होती है, जबकि सरकारें, राजनीतिक दल और नेता अपनी-अपनी जिम्मेदारियां निभाते हैं।

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