E20 पेट्रोल पर सुप्रीम कोर्ट में PIL (सोर्स- सोशल मीडिया) 
देश

इथेनॉल-ब्लेंडेड पेट्रोल पर सुप्रीम कोर्ट में PIL, उपभोक्ताओं के लिए बीमा, सब्सिडी और वैकल्पिक ईंधन की मांग

Ethanol Policy: इथेनॉल-ब्लेंडेड E20 पेट्रोल नीति को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में उपभोक्ताओं के लिए E10 और वाहनों के लिए बीमा सुरक्षा देने की मांग की गई है।

Ethanol Blended E20 Petrol Controversy: देश में इथेनॉल-ब्लेंडेड E20 पेट्रोल को लेकर जारी बहस अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गई है। E20 ईंधन नीति को लेकर सर्वोच्च अदालत में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है, जिसमें उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा और ईंधन विकल्प उपलब्ध कराने की मांग की गई है। याचिका अधिवक्ता नरेंद्र मिश्रा के माध्यम से दाखिल की गई है।

याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि केंद्र सरकार को निर्देश दिए जाएं कि देशभर के सभी पेट्रोल पंपों पर सामान्य पेट्रोल और E10 (10 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित) पेट्रोल की नियमित और निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। इससे वाहन मालिक अपनी जरूरत और वाहन की अनुकूलता के अनुसार ईंधन का विकल्प चुन सकेंगे।

ईंधन मशीनों पर स्पष्ट लेबल लगाने की मांग

याचिका में यह भी कहा गया है कि सभी फ्यूल डिस्पेंसिंग यूनिट्स (ईंधन भरने वाली मशीनों) पर इथेनॉल की मात्रा स्पष्ट रूप से लिखी जाए। साथ ही पेट्रोल पंपों पर ऐसे प्रमुख सूचना बोर्ड लगाए जाएं, जिनसे उपभोक्ताओं को यह जानकारी मिल सके कि उनका वाहन संबंधित ईंधन के उपयोग के लिए उपयुक्त है या नहीं।

पुराने वाहनों के लिए बीमा और सब्सिडी की मांग

जनहित याचिका में केंद्र सरकार से यह भी मांग की गई है कि E20 नीति को पूरी तरह लागू करने से पहले 2023 से पहले निर्मित और वर्तमान में सड़कों पर चल रहे दोपहिया व चारपहिया वाहनों को एक उपयुक्त बीमा योजना के तहत सुरक्षा प्रदान की जाए। इसके अलावा याचिकाकर्ता ने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की नीतियों और दिशानिर्देशों के अनुरूप E20 इथेनॉल-ब्लेंडेड पेट्रोल की लागत पर प्रति लीटर ₹50 से ₹55 तक सरकारी योगदान (सब्सिडी) देने का भी अनुरोध किया है।

E20 नीति पर सियासी घमासान भी तेज

इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। शुक्रवार को इंडियन यूथ कांग्रेस ने E20 इथेनॉल-ब्लेंडेड पेट्रोल नीति के विरोध में प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि यह नीति आम वाहन मालिकों के हितों के बजाय इथेनॉल उत्पादन से जुड़ी कंपनियों को लाभ पहुंचाती है। विरोध प्रदर्शन के दौरान इथेनॉल उत्पादन के प्रतीक के रूप में गन्ने के रस की मशीन लगाई गई और सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए हवा में 200 रुपये के प्रतीकात्मक नकली नोट भी उछाले गए।

अब इस जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के रुख और केंद्र सरकार के जवाब का इंतजार किया जा रहा है। यह मामला देश की ईंधन नीति, वाहन मालिकों के हितों और इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम के भविष्य पर महत्वपूर्ण असर डाल सकता है।

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